30/05/2026
गेंदबाज़ गेंद फेंक कर हैरान थे, फील्डर मैदान में हैरान थे, कमेंटेटर स्टूडियो में हैरान थे और दर्शक टीवी पर हैरान थे, किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है ??
क्योंकि आज से पहले किसी की भी नज़र से क्रिकेट में इस तरह के शॉट गुज़रे ही नहीं थे!!
यह एक मिरेकल लग रहा था एक जादू लग रहा था..
7 मार्च 2002 की बात है, जब भारतीय टीम अपने घरेलू मैदान पर जिम्बाब्वे के खिलाफ एक वनडे मैच खेल रही थी।
वह फरीदाबाद का दिन किसी बुरे सपने की तरह था, जिसे आज भी क्रिकेट प्रेमी भूल नहीं पाए हैं।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने एक मजबूत स्कोर खड़ा किया था।
लक्ष्मण 76, गाँगुली 57, अगरकर 40, कैफ 39, मोंगिआ 25
की बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 274 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य जिम्बाब्वे के सामने रखा था। उस समय 275 का लक्ष्य चेज करना काफी मुश्किल माना जाता था, और भारतीय खेमा जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त था।
मैच के अधिकतर समय तक भारत ने अपनी पकड़ बनाए रखी थी। जिम्बाब्वे के विकेट लगातार गिर रहे थे और ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज आसानी से मैच खत्म कर देंगे।
लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, और वही हुआ। जब Daugi Marillier बल्लेबाज़ी करने आए, तो जिम्बाब्वे की स्थिति बेहद नाजुक थी। मलेर नंबर 9 पर बल्लेबाजी करने उतरे थे और उस समय टीम का स्कोर 44.2 वें ओवर में 210/8 रन था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यहां से मैच पलट सकता है।
Marellier का क्रीज़ पर आना और वो शॉट्स खेलना, जिसने दुनिया को सन्न कर दिया था,
एक जादू जैसा था।
आज जिसे हम 'स्कूप' या 'दिलशान स्कूप' कहते हैं, उस वक्त क्रिकेट की दुनिया में वो शॉट किसी को नहीं पता था। वो गेंद को विकेटकीपर के ऊपर से अजीबोगरीब ढंग से स्कूप कर रहे थे।
उस दौर में ऐसा शॉट खेलना तो दूर, किसी ने सोचा भी नहीं था। वो लगातार जहीर खान और अन्य गेंदबाजों को अपनी कलाकारी से चकमा दे रहे थे।
जहीर खान का वो अंतिम ओवर शायद भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे दर्दनाक ओवरों में गिना जाता है, जिसमें Marellier ने भारत के मुंह से जीत छीन ली थी।
शायद उस समय दुनिया का कोई गेंदबाज़ ऐसे शॉट्स के लिए तैयार ही नहीं था । उसके सपने मैन भी यह शॉट नहीं थे ।
पूरा स्टेडियम और टीवी के सामने बैठे करोड़ों भारतीय दर्शक यह देखकर हैरान थे कि कैसे एक अनजान सा खिलाड़ी अचानक सुपरमैन बन गया।
Marellier की उन 24 गेंदों ने 56 रन बनाकर पूरा खेल बदल दिया।
भारत के हाथ में आई जीत फिसल गई और जिम्बाब्वे ने अंतिम ओवरों में चमत्कार करते हुए 1 विकेट से मैच जीत लिया।
वह जीत केवल एक रन की नहीं थी, बल्कि एक ऐसी हार थी जिसने भारतीय गेंदबाजों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई क्रिकेट का खेल बदल रहा है।
मारेलियर के वो शॉट्स आज के 'रैंप' और 'स्कूप' का जनक बने। उस दिन फरीदाबाद में जो हुआ, वो क्रिकेट के इतिहास में हार-जीत से ऊपर उठकर उस अविश्वसनीय कला के लिए दर्ज हो गया, जिसे दुनिया ने पहली बार देखा था। आज भी जब कोई बल्लेबाज स्कूप खेलता है, तो बरबस डग्लस मलेर की वो शाम याद आ जाती है। यह मैच याद दिलाता है कि क्रिकेट में आखिरी गेंद तक कुछ भी कहना मुश्किल है।
मुझे आज भी याद है, मेने वो मैच लाइव देखा था ।
क्या आपने देखा था ?
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