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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*कर्मकांड प्रदीप*परिज...
07/09/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*कर्मकांड प्रदीप*

परिजन प्रायः पूछते हैं- दम्पति को कहाँ कैसे बैठायें? विभिन्न धर्मग्रन्थों में जो उल्लेख है, वह यहाँ दे रहे हैं- हिंदी अर्थ व्रतबंध (यज्ञोपवीत संस्कार), विवाह, चतुर्थी-कर्म, सहभोज, व्रत, दान, यज्ञ और श्राद्ध के समय पत्नी को पति के दाहिनी ओर बैठना चाहिए। सभी धार्मिक कार्यों में पत्नी का पति के दाहिनी ओर रहना शुभ माना गया है। किंतु अभिषेक तथा ब्राह्मणों के चरण धोने के समय पत्नी को पति के बाईं ओर रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिस पुरुष या स्त्री का संस्कार किया जा रहा हो, उसे सदैव दक्षिण दिशा की ओर बैठना चाहिए और संस्कार कराने वाले आचार्य को उसके उत्तर की ओर स्थित होना चाहिए।
(१) व्यासपीठ नमन, (२) गुरुवन्दना (३) सरस्वती वन्दना (४) व्यास वन्दना। ये चारों कृत्य कर्मकाण्ड के पूर्व के हैं। यजमान के लिए नहीं, सञ्चालक- आचार्य के लिए हैं। कर्मकाण्ड ऋषियों, मनीषियों द्वारा विकसित ज्ञान- विज्ञान से समन्वित अद्भुत कृत्य हैं, उस परम्परा का निर्वाह हमसे हो सके, इसलिए उस स्थान को तथा अपने आपको संस्कारित करने, उस दिव्य प्रवाह का माध्यम बनने की पात्रता पाने के लिए ये कृत्य किये जाते हैं।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

संस्करण के सन्दर्भ में - संस्करण के सन्दर्भ में - कर्मकांड प्रदीप - karmkand pradipNone

तंत्र विद्या की वास्तविक उपयोगिताक्या तंत्र विद्या केवल चमत्कार, वशीकरण और रहस्यमयी क्रियाओं का नाम है? नहीं! प्राचीन भा...
07/09/2026

तंत्र विद्या की वास्तविक उपयोगिता
क्या तंत्र विद्या केवल चमत्कार, वशीकरण और रहस्यमयी क्रियाओं का नाम है? नहीं! प्राचीन भारत में तंत्र विद्या का वास्तविक उद्देश्य आत्मशक्ति को जाग्रत करना और पीड़ित मानवता की सेवा करना था। शक्ति जब सद्भावना से जुड़ती है, तो सेवा बनती है; और जब स्वार्थ से जुड़ती है, तो विनाश का कारण बनती है।

07/09/2026

प्रातःकालीन गुरुदेव की अमृतवाणी
दिव्य प्रवाह का माध्यम
https://youtube.com/shorts/pkhKx2DLShU
तंत्र का सत्य- शक्ति या अंधविश्वास.
https://youtube.com/shorts/cRWgJ6u7vlU
आवाज़_इस्पात_को_कैसे_काटती_है
https://youtube.com/shorts/VHwBNmntXIw
https://www.awgp.org/en/literature/akhandjyoti/1940/August/v2.31

07/09/2026

प्रातःकालीन गुरुदेव की अमृतवाणी
दम्पति को कहाँ कैसे बैठना चाहिए.
https://youtube.com/shorts/A60Q3hbinEE
क्या ध्वनि चेतना जगा सकती है.
https://youtube.com/shorts/q4HAMZGA-84
सम्मोहन_शरीर_को_कैसे_सुन्न_कर_देता_है
https://youtube.com/shorts/g_usUSvWoxo
https://www.awgp.org/en/literature/book/karmkand_pradip/v2

06/09/2026
“क्या अनसुनी ध्वनि भी शक्तिशाली है?”क्या ऐसी ध्वनि भी शक्तिशाली हो सकती है, जिसे हमारे कान सुन ही न सकें?ध्वनि में शक्ति...
06/09/2026

“क्या अनसुनी ध्वनि भी शक्तिशाली है?”
क्या ऐसी ध्वनि भी शक्तिशाली हो सकती है, जिसे हमारे कान सुन ही न सकें?
ध्वनि में शक्ति है—पर उसका सदुपयोग ज्ञान, विवेक और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!युग निर्माण सत्-संकल्...
06/09/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा

आज प्रत्येक विचारशील व्यक्ति यह अनुभव करता है कि मानवीय चेतना में वे दुर्गुण पर्याप्त मात्रा में बढ़ चले हैं, जिनके कारण अशान्ति और अव्यवस्था छाई रहती है। इस स्थिति में परिवर्तन की आवश्यकता अनिवार्य रूप से प्रतीत होती है, पर यह कार्य केवल आकांक्षा मात्र से पूर्ण न हो सकेगा, इसके लिए एक सुनिश्चित दिशा निर्धारित करनी होगी और उसके लिए सक्रिय रूप से संगठित कदम बढ़ाने होंगे। इसके बिना हमारी चाहना एक कल्पना मात्र बनी रहेगी। दूसरों को कुछ करने के लिए कहने का सबसे प्रभावशाली तरीका एक ही है कि हम वैसा करने लगें। अपना निर्माण ही युग निर्माण का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है। बूँद- बूँद जल के मिलने से ही समुद्र बना है। एक- एक अच्छा मनुष्य मिलकर ही अच्छा समाज बनेगा। व्यक्ति निर्माण का व्यापक स्वरूप ही युग निर्माण के रूप में परिलक्षित होगा। इस भावनाओं को गहराई से अपने अंतःकरणों में जब हम जान लेंगे, तो उसका सामूहिक स्वरूप एक युग आकांक्षा के रूप में प्रस्तुत होगा और उसकी पूर्ति के लिए अनेक देवता, अनेक महामानव, नर तन में नारायण रूप धारण करके प्रगट हो पड़ेंगे। युग परिवर्तन के लिए जिस अवतार की आवश्यकता है, वह पहले आकांक्षा के रूप में ही अवतरित होगा। इसी अवतार का सूक्ष्म स्वरूप यह युग निर्माण सत्संकल्प है, इसके महत्त्व का मूल्यांकन हमें गंभीरतापूर्वक ही करना चाहिए।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे। - हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन ....

06/09/2026

प्रातःकालीन गुरुदेव की अमृतवाणी
परिवर्तन की आवश्यकता.
https://youtube.com/shorts/LSBSw4BD-xM
शक्ति-वर्धक_धनुरासन_फेफड़ों_को_कैसे_मजबूत करता है। https://youtube.com/shorts/Dy4r9ELmYWc
अल्ट्रासाउंड और मंत्र-विज्ञान
https://youtube.com/shorts/3_SOnWwlYBQ
https://www.awgp.org/en/literature/book/yug_nirman_sat_sankalp_ki_disha_dhara/v1.2

06/09/2026

Have you ever wondered why two people who live together for many years sometimes begin to think, speak and even behave alike? Have you ever asked Yourself if the universe operates according to the law of karma, what role does prayer play in our lives? Have you ever wondered why “Intimacy and Oneness: The Transforming Power of Close Association.”

https://www.youtube.com/



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