07/09/2026
AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*कर्मकांड प्रदीप*
परिजन प्रायः पूछते हैं- दम्पति को कहाँ कैसे बैठायें? विभिन्न धर्मग्रन्थों में जो उल्लेख है, वह यहाँ दे रहे हैं- हिंदी अर्थ व्रतबंध (यज्ञोपवीत संस्कार), विवाह, चतुर्थी-कर्म, सहभोज, व्रत, दान, यज्ञ और श्राद्ध के समय पत्नी को पति के दाहिनी ओर बैठना चाहिए। सभी धार्मिक कार्यों में पत्नी का पति के दाहिनी ओर रहना शुभ माना गया है। किंतु अभिषेक तथा ब्राह्मणों के चरण धोने के समय पत्नी को पति के बाईं ओर रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिस पुरुष या स्त्री का संस्कार किया जा रहा हो, उसे सदैव दक्षिण दिशा की ओर बैठना चाहिए और संस्कार कराने वाले आचार्य को उसके उत्तर की ओर स्थित होना चाहिए।
(१) व्यासपीठ नमन, (२) गुरुवन्दना (३) सरस्वती वन्दना (४) व्यास वन्दना। ये चारों कृत्य कर्मकाण्ड के पूर्व के हैं। यजमान के लिए नहीं, सञ्चालक- आचार्य के लिए हैं। कर्मकाण्ड ऋषियों, मनीषियों द्वारा विकसित ज्ञान- विज्ञान से समन्वित अद्भुत कृत्य हैं, उस परम्परा का निर्वाह हमसे हो सके, इसलिए उस स्थान को तथा अपने आपको संस्कारित करने, उस दिव्य प्रवाह का माध्यम बनने की पात्रता पाने के लिए ये कृत्य किये जाते हैं।
क्रमशः ........
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संस्करण के सन्दर्भ में - संस्करण के सन्दर्भ में - कर्मकांड प्रदीप - karmkand pradipNone