15/02/2025
मन की ज़मीन पर जिंदगी से झड़े सारे दुःख इकट्ठे होते जाते है । कभी इतनी तेज हवा क्यों नही चलती कि सारे दर्द उड़ जाए और जमीन हल्की हो जाए ? फरवरी से शुरू हुआ पतझड़ पत्तों के साथ साथ कैसी उदासी झड़ाता है कि गुजरते वक्त का पल-पल महसूस होता है । इस महिने में ऐसा क्या है कि समय सिर्फ घड़ी में बह रहा है , ज़ेहन में नही ?
एक उम्र में आने के बाद पतझड़ की तरह ही एक-एक कर सारे सपने भी झरते चले जाते है ..। जो है, ठीक है । किसी चाहना के लिए विकलता नही , किसी अवसर के लिए बेसब्री नही ....। ठूठ की तरह शांत रह बेध्यानी से बहार का इंतज़ार करना है । पेड़ कितनी भी कोशिश या कामना करें नए पत्तों की लेकिन समय के पहले नही आएंगे । फरवरी के अलसाये महीने में कुदरत का ढीलापन मन पर हावी होने लगता है । जीवन कहता है कि सब कुछ तेरे वश में नही तो अच्छा-बुरा बस गुजर जाने दे ।
अनुभवी इंसान भी पेड़ बन जाता है। समय आने पर ही सब सही होगा , बेख़्वाहिश मिजाज़ में रहते हुए सब्र रखना । पकी उम्र के लोगों में खिन्नता, ईर्ष्या, क्रोध और अधीरता देखने पर करुणा उपजती है कि उसने जीवन से कुछ नही सीखा । जिंदगी के सफ़र में चाहतों का सामान जितना अधिक होगा मुसाफ़िर को उतनी मुश्किलें होंगी। राहत के लिए ख्वाहिशों का बोझ कम ढोना चाहिए ।
फरवरी का महीना जब धूप अपनी लुनाई खो रहा , नज़ारे बदरंग हो रहे , हवा में रुखाई आ रही रहे ऐसा समय जब कोई बेहद अज़ीज लंबे समय साथ रहने के बाद घर से विदा होने के लिए दरवाज़े पर खड़ा है । खाली खाली घर, खाली खाली मन ।
कुछ सूने मौसम अनमना करते है । फरवरी की तासीर में वही उदासी है ।
RBM.....
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