27/07/2022
उलझ 🟡 के तेरी जुल्फों में यू आबाद हो जाऊ ❓
कि जैसे में लखनऊ का अमीनाबाद हो
मैं जमुना की तरह निहारु ताज को कब ❓
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊ
गजल कहने लगा हूं ना जरा सा मुस्कुरा तो ❓
यही तो चाहती थी तुम कि मैं बर्बाद हो जाऊं