Shaheed Bhagat Singh Youth Club, Ghursal, Hisar

Shaheed Bhagat Singh Youth Club, Ghursal, Hisar Social work, Help to needy people, Blood Donation

Let’s celebrate the spirit of freedom and pledge to contribute to our country’s progress. Happy Independence Day to all ...
14/08/2025

Let’s celebrate the spirit of freedom and pledge to contribute to our country’s progress. Happy Independence Day to all family members

देश की सरकार भगत सिंह को शहीद नहीं मानती है , जबकि आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले भगतसिंह हर हिन्दुस्ता नी के ...
23/03/2022

देश की सरकार भगत सिंह को शहीद नहीं मानती है , जबकि आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले भगतसिंह हर हिन्दुस्ता नी के दिल में बसते हैं ।
भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था , जो अब पाकिस्तान में है । उस समय उनके चाचा अजीत सिंह और श्वान सिंह भारत की आजादी में अपना सहयोग दे रहे थे । ये दोनों करतार सिंह सराभा द्वारा संचालित गदर पाटी के सदस्य थे । भगत सिंह पर इन दोनों का गहरा प्रभाव पड़ा था । इसलिए ये बचपन से ही अं ग्रेजों से घृणा करने लगे थे । भगतसिंह करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से अत्यधिक प्रभावित थे । 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला । लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने 1920 में महात्मा गांधी द्वा रा चलाए जा रहे अहिंसा आंदोलन में भाग लेने लगे , जिसमें गांधी जी विदेशी समानों का बहिष्कार कर रहे थे ।

14 वर्ष की आयु में ही भगत सिंह ने सरकारी स्कूलों की पुस्तकें और कपड़े जला दिए। इसके बाद इनके पोस्टर गांवों में छपने लगे । भगत सिंह पहले महात्मा गांधी द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन और भारतीय नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य थे । 1921 में जब चौरा -चौरा हत्याकांड के बाद गांधी जी ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भगत सिंह पर उसका गहरा प्रभाव पड़ा । उसके बाद चन्द्रशेखरआजाद के नेतृत्व में गठित हुई गदर दल के हिस्सा बन गए।

उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया । 9 अगस्त, 1925 को शाहजहांपुर से लखनऊ के लिए चली 8 नंबर डाउन पैसें जर से काकोरी नामक छोटे से स्टेशन पर सरकारी खजाने को लूट लिया गया । यह घटना काकोरी कांड नाम से इतिहास में प्रसिद्ध है । इस घटना को अंजाम भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और प्रमुख क्रांतिकारियों ने साथ मिलकर अंजाम दिया था ।

काकोरी कांड के बाद अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के क्रांतिकारियों की धरपकड़ तेज कर दी और जगह-जगह अपने एजेंट्स बहाल कर दिए। भगत सिंह और सुखदेव लाहौर पहुंच गए। वहां उनके चाचा सरदार किशन सिंह ने एक खटाल खोल दिया और कहा कि अब यहीं रहो और दूध का कारोबार करो ।
वे भगत सिंह की शादी कराना चाहते थे और एक बार लड़की वालों को भी ले कर पहुंचे थे । भगतसिंह कागज-पेंसिल ले दूध का हिसाब करते , पर कभी हिसाब सही मिलता नहीं । सुखदेव खुद ढेर सा रा दूध पी जाते और दूसरों को भी मुफ्त पिलाते ।

क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेंबली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे । भगत सिंह क्रांतिकारी देशभक्त ही नहीं बल्कि एक अध्ययनशीरल विचारक, कलम के धनी , दार्शनिक, चिंतक, लेखक, पत्रकार
और महान मनुष्य थे । उन्होंने 23 वर्ष की छोटी -सी आयु में फ्रांस, आयरलैं ड और रूस की क्रांतिका विषद अध्ययन किया था । हिन्दी , उर्दू, अंग्रे जी , संस्कृत, पंजाबी , बंगला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक भगतसिंह भारत में समाजवाद के पहले व्याख्याता थे । भगत सिंह अच्छे वक्ता , पाठक और लेखक भी थे । उन्होंने 'अकाली ' और 'कीर्ति ' दो अखबारों का संपादन भी किया ।

जेल में भगत सिंह ने करीब दो साल रहे । इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रांतिकारी विचार व्यक्त करते रहे । जेल में रहते हुए उनका अध्ययन बराबर जारी रहा । उस दौरान उनके लिखे गए लेख व परिवार को लिखे गए पत्र आज भी उनके विचारों के दर्पण हैं ।अपने लेखों में उन्होंने कई तरह से पूंजीपतियों को अपना शत्रु बताया है । उन्होंने लिखा कि मजदूरों का शोषण करने वाला चाहें एक भारतीय ही क्यों न हो , वह उनका शत्रु है । उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था 'मैं नास्तिक क्यों हूं '? जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हड़ताल की । उनके एक सा थी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिए थे ।
23 मार्च 1931 को भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फांसी दे दी गई।

https://www.youtube.com/watch?v=TbpKYXGymrA
16/02/2022

https://www.youtube.com/watch?v=TbpKYXGymrA

kabaddi live today,kabaddi live match,kabaddi live 2022,kabaddi live 2021 today,kabaddi live kaise dekhe,kabaddi live channel,kabaddi live girlsखेलो इंडिया ल...

भगवान के दिए में से कुछ तो दान कर,जब तेरा कुछ नहीं है तो बस तुं दान कर।रक्त है कोई धन दौलत नहीं है,पुण्य होगा, हर मोड़ प...
14/06/2020

भगवान के दिए में से कुछ तो दान कर,
जब तेरा कुछ नहीं है तो बस तुं दान कर।
रक्त है कोई धन दौलत नहीं है,
पुण्य होगा, हर मोड़ पर तेरे आगे आएगा,
कुछ और नहीं है तो तु बस रक्तदान कर।।

श्योप्रकाश सहारण
प्रधान
शहीद भगत सिंह यूथ क्लब , घुड़साल

22/03/2020

कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत में कोरोना वायरल की टैस्टिंग करने के लिए लेब नहीं है। आप को बता दूं लाखों की संख्या में प्रतिभाशाली लेब टेक्नीशियन दर -दर की ठोकरें खा कर 10-15 हजार की नोकरी करने पर मजबुर है और कुछ तो लाखों रूपए पढ़ाई पर खर्च कर घर बैठने पर भी मजबुर है। देश में प्रतिभाशाली लोगों की कभी नहीं है और हर क्षेत्र का यही हाल है । प्रतिभाशाली लोगों को सम्मान जनक वेतन के साथ रोजगार चाहिए, आज जरूरत के समय पर सब देश और सरकार को कोश रहे हैं। जब नोकरी वितरण की बात आती है तो मैं पहले- मैं पहले कर के जुगाड़ करने में लगे रहते हैं और 100 की खाली जगह भरने के लिए लाखों करोड़ों फार्म नोकरी पाने आते हैं ।अगर समय पर प्रतिभाशाली बच्चों को रोजगार दिया जाए तो इस तरह की नौबत नहीं आती। आज जहां देखो वहीं भीड़ नजर आती है बैंक, हास्पिटल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, डाक घर, नगर निगम, तहसील, कोर्ट कोई जगह ऐसी नहीं है जहां आपका काम घंटों में भी हो जाए। हर आदमी समय बचाने के लिए हर जगह रिश्र्वत देता है, नहीं देता तो काम में अड़चन लगा कर ले ली जाती है। यहीं अगर निमित्त फिस के तौर पर ले ली जाए और काम का समय निर्धारित कर दिया जाए तो रोजगार भी बढ़ेंगे और हमारा काम भी समय पर होगा और उन गद्दारों का घर भी नहीं भरेगा जो आज समाज की रीढ़ की हड्डियों को तोड़ने का काम कर रही हैं। हमारे सिस्टम में ही खराबी है और सिर्फ हम सरकार को कोश ही रहे हैं। जब वोट की बात आती है नेताओं का रुख बदला होता है पर जब काम की बात आती है तो इनके तैवर बदल जाते हैं। हर बार वही तीन-चार मुद्दे ले कर फिर से मैदान में आ जाते हैं। ये समझते हैं कि जनता भोली है पर सच में जनता भोली नहीं मुर्ख है जो आसानी से इनके कुछ कहने-सुनने पर अपने पुराने मुद्दों पर चर्चा भी नहीं करती, जनता को अपने तैवर बदलने होंगे हर काम का हिसाब लेना होगा तभी सिस्टम सुधरेगा नहीं तो यह लोग हमारी मानसिकता से खेलना अच्छे से समझ गए हैैं कि कैसे हिन्दू -मुस्लिम और एसी , बीसीऔर जरनल और गरीब-अमीर फेर में फसा कर हमारी मानसिकता से खेल सकें।

हर क्षेत्र में हमारे बच्चे और साथी निपुण हैं तो सरकार रोजगार देने में देरी क्यों कर रही? क्यों हर वेकेंसी कोर्ट में चली जाती है ? सरकार खाली स्थान भरने में क्यों देरी करती है? और कितनी जनसंख्या पर कितने कर्मचारी होने चाहिए ? इस तरह के बहुत से प्रश्नों को हमें उठाना चाहिए।

जागरूक बनें मुर्ख नहीं।

मैं एक पेड़ हूँ। मेरा जन्म भी आज़ाद हिंदुस्तान में हुआ था।एक किसान के बेटे ने आज़ादी की ख़ुशी में मुझे लगाया था।वो रोज़ आकर म...
21/09/2019

मैं एक पेड़ हूँ। मेरा जन्म भी आज़ाद हिंदुस्तान में हुआ था।
एक किसान के बेटे ने आज़ादी की ख़ुशी में मुझे लगाया था।
वो रोज़ आकर मुझे देखता था, पानी से सींचता था।
मैं भी उसे खुश देख, दिन दूना रात चौगुना बढ़ता था।
बड़ा होने पर मेरी छाव के निचे वो थकान मिटाता था।
मैं और वो किसान के बच्चे साथ साथ बड़े हो रहे थे।
उसकी पत्नी खाना लिए बच्चो के साथ आती थी।
बेटा मेरी डाली पर चढ़कर झूला लगाता था।
बेटा-बेटियां शाम तक झूला झूला खेला करते थे।
मैं अब जवान हो गया था, मुझे लगाने वाला भी साथ छोड़ गया था।
किसान के बेटे का भी अब छोटा सा परिवार था।
वोही बचपन के दिन फिरसे लौट आये थे।
सच में वो भी कितने अच्छे दिन थे।

आज में 67 साल का हो गया हूँ , उम्र में मोदीजी से थोड़ा ही बड़ा हूँ।
साल अच्छे और बुरे दोनों देखें है मैंने , लेकिन गुजारा हो जाता था।
इसबार फसल अच्छी थी। लेकिन कल की किसे खबर थी।
बिन मौसम बारिश आ गई। साथ में ओले भी बरसा गई।
लहलहाती फसल देखते ही देखते बर्बाद हो गई।
किसान का बेटा आता था ,खेत में चक्कर लगाता था।
इसी छाव में बैठ घंटो तक़दीर पर आंसू बहाता था।
एक दिन वो “अच्छे दिन आनेवाले है” जैसा कुछ गुनगुना रहा था।
अगले दिन रेडिओपर उसने “मन की बात” सुनी और मुझे भी सुनाई।
मुआवज़े की बात सुन उसकी आंखोमे आश की किरण नज़र आई थी।
कई दिनों से फिर वो उदास रहता था , अब तो बर्बाद फसल भी सुख गई थी।
वो खेत को देखता रहता था शायद अब उसकी धीरज भी टूट रही थी।

एक प्रातःकाल वो आया , बेल के गले से रस्सी छुड़ाई ,
मेरे सीने से लग ऊपर चढ़ा और मेरी ही बाहों पर लटक गया।
उसके सीने की धड़कन मैंने साफ़ सुनी थी और अंतिम सांस की तड़पन भी ।
मैं कुछ ना कर सका। अपने किसान पुत्र की ख़ुदकुशी का बोज मैं महसूस कर सकता था।
मुझे काट डालो और हो सके तो मेरे उस बेटे के साथ ही जलादो।
मुझे अब और नहीं है जीना ,मुझे अब और नहीं है जीना।

08/06/2019

रुंदन नहीं है रोने को, कोई कोना नही सिर छूपाने को।
कैसा इंसान बन गया तूं, सिर्फ तपिश लगा बुझाने को।।
चिंतन मंनन को मन नही है या जमीर गया मयखानोंं को।
निर्दयता की हद होती है आग लगा दो ऐसे जमाने को।।
-Aligarh Case😰😰😰

20/03/2019

शहीद भगतसिंह युवा मंडल घुड़साल की ओर से सभी साथियों को रंगों के त्यौहार होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

30/01/2019

*****दूध में मिलावट के खिलाफ आवाज उठाओ*****

आपने आस पास लोगों को समझाओ और दूध के अंदर मिलावट के खिलाफ आवाज उठाओI मिलावटी दूध इंसान के जीवन में धीमा जहर है I

दूध पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दूध पीने से ताकत मिलती है। ये बात तो हम सभी जानते हैं दूध में लगभग वो हर तत्व मौजूद होता है जो शरीर के लिए आवश्यक होता है। ये विटामिन, कैल्शियम, प्रोटीन, नियासिन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का खजाना होता है। लेकिन क्‍या आप सच में शुद्ध दूध पी रहे हैं? कहीं आप दूध के साथ जहरीला पदार्थ तो नहीं पी रहे हैं? जी हां, मार्केट में मिलने वाले दूध मिलावटी भी हो सकते हैं। अगर आपको किसी प्रकार की शंका है तो इन 4 आसान तरीकों से आप दूध का परीक्षण कर सकते हैं।

*दूध में डिटर्जेंट का परीक्षण*
अक्‍सर खबरों में मिलावटी दूध का भंडाफोड़ देखने और सुनने को मिलता है, जिसमें सबसे ज्‍यादा डिटर्जेंट की मिलावट देखने को मिलती है। अगर आपको लगता है कि दूध में मिलावट हो सकती है तो इसे जांच करना बहुत आसान है। आधा कप दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं, यदि झाग आए तो दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है।

*सिंथेटिक दूध का परीक्षण*
अगर आपको लगता है कि दूध सिंथेटिक है तो इसकी भी पहचान की जा सकती है। सिंथेटिक दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें यदि यह साबुन जैसा लगे तो यह सिंथेटिक दूध हो सकता है। इसके अलावा सिंथेटिक दूध गर्म करने पर हल्‍का पीला हो जाता है। इस प्रकार के दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। यह सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकते हैं।

*दूध में स्‍टार्च का परीक्षण*
आजकल खुले दूध पर भरोसा करना थोड़ा मुश्किल है। आपूर्ति और ज्‍यादा पैसा कमाने के चक्‍कर में लोग दूध में तरह-तरह की चीजें मिलाते हैं। कई लोग दूध में स्‍टार्च मिलाकर भी बेचते हैं। अगर आपको लगता है कि दूध में स्‍टार्च की मिलावट है तो इसकी जांच की जा सकती है। इसके लिए दूध में कुछ बूदें आयोडीन टिंचर या आयोडीन सॉल्‍यूशन की डालें, यदि दूध का रंग नीला हो जाए तो इसका मतलब दूध मिलावटी है।

*दूध में पानी का परीक्षण*
दूध की कुछ बूंदें किसी सतह पर डालें, इसके बाद सतह को थोड़ा टेढ़ा करें यदि दूध की बूंद धीरे-धीरे ढलान की तरफ जाए और पीछे सफेद लकीर छोड़े तो इसका मतलब इसमें पानी का मिश्रण नहीं है और जब दूध बूंद तेजी से ढलान की तरफ जाए और निशान भी न छोड़े तो इसका मतलब पानी की मिलावट की गई है।

श्योप्रकाश सहारण
प्रधान
शहीद भगत सिंह युथ क्लब घुड़साल (हिसार)

Address

V&PO-Ghursal
Adampur
125052

Telephone

9813811985

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shaheed Bhagat Singh Youth Club, Ghursal, Hisar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Shaheed Bhagat Singh Youth Club, Ghursal, Hisar:

Shortcuts

Share