Akki Durgapuria

Akki Durgapuria want to play in pro Kabbadi league

01/15/2022
03/29/2020
चौधरी जी #जाट_देवतासभी जाट वीरों को जाट रेजीमेंट के स्थापना दिवस (20 नवम्बर) की हार्दिक बधाई । आज जाट रेजिमेंट का 224 वा...
11/20/2019

चौधरी जी
#जाट_देवता

सभी जाट वीरों को जाट रेजीमेंट के स्थापना दिवस (20 नवम्बर) की हार्दिक बधाई । आज जाट रेजिमेंट का 224 वाँ स्थापना दिवस है ।

•स्थापना:1795
•आदर्श वाक्य: “संगठन व वीरता”
•युद्धघोष: “ #जाट_बलवान_जय_भगवान ”
•मुख्यालय:बरेली, उत्तरप्रदेश
•आकार: 23 बटालियन
•प्रमुख तथ्य: जाट रेजिमेंट भारतीय सेना की एक इंफेंट्री रेजिमेंट है और भारत में सबसे पुरानी और सबसे अधिक पदक प्राप्त करने वाली रेजीमेंट में से एक है। सन 1839 से 1947 के बीच यह रेजिमेंट 9 वीरता, 2 विकटोरिया और 2 जॉर्ज पुरस्कारों के साथ 41 युद्ध सम्मान प्राप्त कर चुकी है । जाट रेजिमेंट के पास 2 अशोक चक्र, 35 शौर्य चक्र, 10 महावीर चक्र, 2 विक्टोरिया क्रॉस, 2 जॉर्ज सम्मान, 8 कीर्ति चक्र, 39 वीर चक्र, और 170 सेना पदक भी शामिल हैं । ये काफी पुराने आंकड़े है इसलिए नए आंकड़ो के अनुसार जाट रेजिमेंट के पास इनसे भी ज्यादा पदक है ।
इस रेजिमेंट में मुख्यतः पश्चिमी उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के हिन्दू जाटों की भर्ती की जाती है । जाट रेजिमेंट में लगभग 96% जाट सैनिक है सिर्फ एक बटालियन में अजगर यानी अहीर , जाट, गुजर और राजपूत हैं । जाट रेजिमेंट ही भारत की एकमात्र रेजिमेंट है जिनमें उसकी कौम का युद्धघोष है । इसका कारण जाट रेजिमेंट का शुद्ध जाट होना है । बाकी किसी भी जातिगत रेजिमेंट में उस जाति के 100% सैनिक नहीं होते । राजपूत रेजिमेंट में भी सिर्फ 40% राजपूत है 30% गुर्जर और बाकी ब्राह्मण इत्यादि । राजपुताना रायफल्स में भी 50% राजपूत और 45% जाट, 5% अन्य ।
इस प्रकार जाट रेजिमेंट शुद्ध जाट(4.35% को छोड़कर) सैनिकों से भरी है ।
आपको ये भी बता दें कि जाट रेजिमेंट 23 बटालियनों के साथ देश की सबसे बड़ी रेजीमेंट है । 1 बटालियन में 850 सैनिक होते है । सबसे बड़ी रेजिमेंट के साथ ही सबसे ज्यादा सम्मान पाने का रिकॉर्ड भी जाट रेजिमेंट के नाम ही है । जाटों का इतिहास गौरवशाली इतिहास है। जाटवीरों ने रेजीमेंट की स्थापना के बाद से अब तक अपने अदम्य साहस और शौर्यता से गौरवशाली इतिहास लिखा है। कई लड़ाइयों में दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं। सेंटर में स्थापित जाट म्यूजियम इसका गवाह है, जिसमें कई लड़ाइयों से संबंधित रिकार्ड और दुश्मनों देशों से जंग में छीने गए अस्त्र-शस्त्र भी मौजूद हैं। शहीद जाट वीरों के चित्र और उनकी गौरवगाथा भी म्यूजियम में उपलब्ध हैं। यूँ तो भारत में सेना के 23 ट्रेनिंग सेंटर है लेकिन सबसे अच्छे और बहादुर सैनिक जाट रेजिमेंट सेंटर बरेली में ही तैयार किये जाते है । जाट रेजिमेंट की सराहना तो पाकिस्तानी मेजर जनरल फैजल मुकीम खान ने भी की है । उस पोस्ट को तो आप सब लोगों ने कई बार पढ़ा होगा । भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन ने जाट सेण्टर बरेली में भाषण दिया कि - #जाटों_का_इतिहास_भारत_का_इतिहास_है और जाट रेजिमेंट का इतिहास भारतीय सेना का इतिहास है । पश्चिम में फ्रांस से पूर्व में चीन तक ‘जाट बलवान्-जय भगवान्’ का रणघोष गूंजता रहा है ।
अगर आपको जाट रेजिमेंट के वीर जवानों की गाथा सुननी हो और उनके बहादुरी के किस्से जानने हो तो आप YouTube पे जाट रेजिमेंट की काफी सारी मूवी देख सकते है जो जाट रेजिमेंट के तत्वाधान में ही बनाई गयी है ।
अगर आपको भी जाट रेजिमेंट पर गर्व है तो ये पोस्ट ज्यादा से ज्यादा शेयर करके सभी लोगो तक पहुचाएं ।

जय जाट


- akki Durgapuria 💖💪👊 .
संगठन युवा शक्ति ( 1 man Army )

हिन्दू धर्मरक्षक महाराजा सूरजमल की हत्या कैसे हूई  :- NCERT  की किताब में कभी यह इतिहास पढ़ा ?एक नहीं, कई लाल हुए इस भारत...
12/25/2018

हिन्दू धर्मरक्षक महाराजा सूरजमल की हत्या कैसे हूई :-

NCERT की किताब में कभी यह इतिहास पढ़ा ?
एक नहीं, कई लाल हुए इस भारत धरती पर।

"दिल्ली के बादशाह नवाब नजीबुद्दौला के दरबार में एक सुखपाल नाम का ब्राह्मण काम करता था ।
एक दिन उसकी लड़की अपने पिता को खाना देने महल में चली गयी , मुग़ल बादशाह उसके रूप पर मोहित हो गया । और ब्राह्मण से अपनी लड़की कि शादी उससे करने को कहा और बदले में उसको जागीरदार बनाने का लालच दिया और न मानने पर गर्दन कटवाने का डर दिखाया। भयभीत ब्राह्मण क्या करता ? मान गया और अपनी बेटी की शादी मुग़ल बादशाह से करने को तैयार हो गया ।
जब लड़की ने यह बात सुनी तो उसने शादी से इंकार कर दिया इससे क्रोधित होकर बादशाह ने लड़की को जिन्दा जलाने का आदेश दिया । मौलवियो ने बादशाह से कहा ऐसा तो यह मर जायेगी । आप इस को जेल में डालकर कष्ट दो और इस पर हरम में आने का दबाव डालो । बादशाह बात मान गया और लड़की को जेल में डाल दिया ।
लड़की ने जेल कि जमादारनी से कहा कि क्या इस देश में कोई ऐसा राजा नहीं है जो हिन्दू लड़की कि लाज बचा सके । जमादारनी ने कहा ऐसा वीर तो सिर्फ एक ही है लोहागढ़ नरेश महाराजा सूरजमल जाट । बेटी तू एक पत्र लिख वो पत्र मैं तेरी माँ को दे दूंगी । लड़की के दुखो को देख वहाँ काम करने वाली जमादारनी ने लड़की कि मदद कि और लड़की ने महाराजा सूरजमल के नाम एक पत्र लिखा और उसकी माँ वो पत्र लेकर महाराजा सूरजमल से पास गयी ।
उसकी कहानी सुन सूरजमल ने ब्रहामण की लड़की छुड़ाने के लिए अपने दूत वीरपाल गुर्जर को दिल्ली भेजा ।
वहाँ दिल्ली दरबार में जब गूर्जर ने महाराजा सूरजमल जाट का पक्ष रखते हुए लड़की को छोड़ने की बात कही तो बादशाह ने कहा कि "सूरजमल जाट हमसे क्या ब्रहामणी छुडवाएगा , सूरजमल जाट को जाकर कहना कि अपनी जाटनी महारानी को भी हमारे पास लेकर आए ।"
अपनी जाटनी महारानी के अपमान में यह शब्द सूनकर गुर्जर मुसलमानों के भरे दरबार में क्रोध से टूट पड़ा । तब बादशाह ने गुर्जर कि हत्या का दी और मरते मरते गूर्जर दूत ने कहा कि "वो पूत जाटनी का है , तेरी नानी याद दिला देगा"
अपने दूत गूर्जर की हत्या की सूचना और महारानी के अपमान की बात जब भरतपुर में महाराजा सूरजमल ने सुनी तो गुर्रा के खेड़े हुए और बोले :-

"चालो र जाट - हिला दो दिल्ली के पाट" और दिल्ली पर जाटों ने चढाई कर दी ।
गोर गोर जाट चले
अपनी लाड़ली सुसराल चले
हाथो में तलवार लेकर
मुगलो के बनने जमाई

सूरजमल जाट अपने साथ अपनी जाटनी महारानी को भी युद्ध में ले गया । जाटों ने दिल्ली घेर ली और बादशाह के पास संदेश भिजवाया कि मैं अपनी जाटनी महारनी को साथ लेकर आया हूँ और अब देखता हूँ कि तू मुझसे जाटनी लेकर जाता है या नाक रगड़कर ब्रहामण की हिन्दू कन्या सम्मान सहित लौटाकर जाता है ।
25 दिसंबर 1763 को दोनों सेनाओं के बीच युद्ध हुआ और महाराजा सूरजमल युद्ध जीत गए ।
बादशाह नजीबुद्दौला ने महाराजा सूरजमल के पैर पकड़ लिये और बोला मैं तो आप कि गाय हूँ मुझे छोड़ दो महाराजा । बादशाह ने सम्मान सहित ब्रहामण की लड़की को सूरजमल को लौटा दिया ।

बादशाह ने पैरों में पड़कर महाराजा सूरजमल से संधि की भीख मांगी और उन्हें उनके साथ दिल्ली चलने का न्योता दिया । युद्ध जीतकर महाराजा सूरजमल ने अपनी सेना को लौटा दिया और खुद जीत की खुशी मे मगन होकर मुस्लिम बादशाह पर ताबेदारी दिखाने के लिए कुछ सैनिकों को लेकर उनके साथ चल दिए ।
रास्ते में हिडन नदी के तट पर उन्हें धोखा देकर सूरजमल जी की हत्या कर दी ।
यह हिन्दू धर्म की जातिय एकता का अनुठा उदाहरण है कि एक पंडित की बेटी की लाज बचाने के लिए पंडिताईन जाटों से गुहार लगाती है । जाट अपने विश्वासपात्र गूर्जर को भेजते है । जाटनी के अपमान में गूर्जर वीरगति को प्राप्त होता है । गूर्जर की मौत से जाट दिल्ली पर चढ़ाई कर देते हैं ।

ऐसे हिन्दू वीर सूरजमल को और ऐसी हिन्दू एकता को शत शत नमन । हिन्दू धर्म के महान योद्धा को श्रद्धांजलि दे ।
जय सूरजमल !

Bajrang dal, Palwal
- akki Durgapuria 💖💪👊.

11/13/2018




महाराजा रणजीत सिंह की के जन्मदिवस की शुभकामनाएं..!!

महाराजा रणजीत सिंह जट्ट (जाट )
रणजीत सिंह का उपनाम शेर-ए- पंजाब था महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 13 नवंबर, 1780 गुंजारवाला ( पश्चिम पंजाब – वर्तमान समय में पाकिस्तान का हिस्सा) एक जाट परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम महा सिंह और माता का नाम राज कौर
था महाराजा रणजीत का विवाह 16 वर्ष की आयु में महतबा कौर से हुआ था। उन्होंने कई शादियाँ की, कुछ लोग मानते हैं कि उनकी 20 शादियाँ हुई थीं।उनकी मृत्यु सन 1839 हुई थी वो वर्तमान भारत पाकिस्तान से लेकर अफगानिस्तान तक जाट साम्राज्य के संस्थापक थे

महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) का नाम भारतीय इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। पंजाब के इस महावीर नें अपने साहस और वीरता के दम पर कई भीषण युद्ध जीते थे। रणजीत सिंह के पिता सुकरचकिया मिसल के मुखिया थे। बचपन में रणजीत सिंह चेचक की बीमारी से ग्रस्त हो गये थे, उसी कारण उनकी बायीं आँख दृष्टिहीन हो गयी थी।महाराजा रणजीत सिंह नें लगभग 40 वर्ष शासन किया। अपने राज्य को उन्होने इस कदर शक्तिशाली और समृद्ध बनाया था कि उनके जीते जी किसी आक्रमणकारी सेना की उनके साम्राज्य की और आँख उठा नें की हिम्मत नहीं होती थी।
महा सिंह और राज कौर के पुत्र रणजीत सिंह दस साल की उम्र से ही घुड़सवारी, तलवारबाज़ी, एवं अन्य युद्ध कौशल में पारंगत हो गये। नन्ही उम्र में ही रणजीत सिंह अपने पिता महा सिंह के साथ अलग-अलग सैनिक अभियानों में जाने लगे थे। अपने पराक्रम से विरोधियों को धूल चटा देने वाले रणजीत सिंह पर 13 साल की कोमल आयु में प्राण घातक हमला हुआ था। हमला करने वाले हशमत खां को किशोर रणजीत सिंह नें खुद ही मौत की नींद सुला दिया।
उनके राज में कभी किसी अपराधी को मृत्यु दंड नहीं दिया गया था। रणजीत सिंह बड़े ही उदारवादी राजा थे, किसी राज्य को जीत कर भी वह अपने शत्रु को बदले में कुछ ना कुछ जागीर दे दिया करते थे ताकि वह अपना जीवन निर्वाह कर सके।वो महाराजा रणजीत सिंह ही थे जिन्होंने हरमंदिर साहिब यानि गोल्डन टेम्पल का जीर्णोधार करवाया था।काशी के विश्वनाथ मंदिर में भी उन्होंने अकूत सोना अर्पित किया था। वो भारत के अंतिम राजा थे जिनके पास कोहिनूर हीरा था

पंजाब के भिन्न-भिन्न मिसलों पर जीत हासिल की

ई॰ 1803 में अकालगढ़ पर विजय।
ई॰ 1804 में डांग तथा कसूर पर विजय।
ई॰ 1805 में अमृतसर पर विजय।
ई॰ 1809 में गुजरात पर विजय।
महाराजा रणजीत सिंह नें किया सतलज पार के प्रदेशो को अपने आधीन
ई 1806 में दोलाधी गाँव पर किया कब्जा।
ई॰ 1806 में ही लुधियाना पर जीत हासिल की।
ई॰ 1807 में जीरा बदनी और नारायणगढ़ पर जीत हासिल की।
ई॰ 1807 में ही फिरोज़पुर पर विजय प्राप्त की।
Related: छत्रपति शिवाजी महाराज का ओजपूर्ण इतिहास
अमृतसर की संधि
महाराज रणजीत सिंह के सैनिक अभियानों से डर कर सतलज पार बसी हुई सिख रियासतों ने अंग्रेजो से संरक्षण देने की प्रार्थना की थी ताकि वह सब बचे रह सकें| तभी उन रियासतों की प्रार्थना पर गर्वनर जनरल लार्ड मिन्टो ने सर चार्ल्स मेटकाफ को रणजीत सिंह से संधि करने हेतु उनके वहाँ भेजा था| पहले तो रणजीतसिंह संधि प्रस्ताव पर सहमत नही हुए परंतु जब लार्ड मिन्टो ने मेटकाफ के साथ आक्टरलोनी के नेतृत्व में एक विशाल सैनिक टुकड़ी भेजी और उन्होंने अंग्रेज़ सैनिक शक्ति की धमकी दी तब रणजीतसिंह को समय की मांग के आगे झुकना पड़ा था।

अंत में चातुर्यपूर्वक महाराजा रणजीत सिंह नें तारीख 25 अप्रैल 1809 ईस्वी के दिन अंग्रेजो से संधि कर ली। इतिहास में यह संधि अमृतसर की संधि कही जाती है।

कांगड़ा पर विजय (ई॰ 1809)
अमरसिंह थापा नें ई॰ 1809 में कांगड़ा पर आक्रमण कर दिया था। उस समय वहाँ संसारचंद्र राजगद्दी पर थे। मुसीबत के समय उस वक्त संसारचंद्र नें रणजीतसिंह से मदद मांगी, तब उन्होने फौरन उनकी मदद के लिए एक विशाल सेना की रवाना कर दी, सिख सेना को सामने आता देख कर ही अमरसिंह थापा की हिम्मत जवाब दे गयी और वह सेना सहित उल्टे पाँव वहाँ से भाग निकले। इस प्रकार कांगड़ा राज्य पर भी रणजीत सिंह का आधिपत्य हो गया।

मुल्तान पर विजय (ई॰ 1818)
उस समय मुल्तान के शासक मुजफ्फरखा थे उन्होने सिख सेना का वीरतापूर्ण सामना किया था पर अंत में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। महाराजा रणजीत सिंह की और से वह युद्ध मिश्र दीवानचंद और खड्गसिंह नें लड़ा था और मुल्तान पर विजय प्राप्त की थी। इस तरह महाराजा रणजीत सिंह नें ई॰ 1818 में मुल्तान को अपने आधीन कर लिया।

कटक राज्य पर विजय (ई॰ 1813)
वर्ष 1813 में महाराजा रणजीत सिंह ने कूटनीति द्वारा काम लेते हुए कटक राज्य पर भी अधिकार कर लिया था | ऐसा कहा जाता है की उन्होंने कटक राज्य के गर्वनर जहादांद को एक लाख रूपये की राशि भेंट दे कर ई॰ 1813 में कटक पर अधिकार प्राप्त कर लिया था|

कश्मीर पर विजय (ई॰ 1819)
महाराजा रणजीत सिंह नें 1819 ई. में मिश्र दीवानचंद के नेतृत्व मे विशाल सेना कश्मीर की और आक्रमण करने भेजी थी। उस समय कश्मीर में अफगान शासक जब्बार खां का आधिपत्य था। उन्होनें रणजीत सिंह की भेजी हुई सिख सेना का पुरज़ोर मुकाबला किया परन्तु उन्हे पराजय का स्वाद ही चखना पड़ा। अब कश्मीर पर भी रणजीत सिंह का पूर्ण अधिकार हो गया था।

डेराजात की विजय (ई॰ 1820-21)
आगे बढ़ते हुए ई॰ 1820-21 में महाराजा रणजीत सिंह ने क्रमवार डेरागाजी खा, इस्माइलखा और बन्नू पर विजय हासिल कर के अपना अधिकार सिद्ध कर लिया था।

पेशावर की विजय (ई॰ 1823-24)
पेशावर पर जीत हासिल करने हेतु ई॰ 1823. में महाराजा रणजीत सिंह ने वहाँ एक विशाल सेना भेज दी। उस समय सिक्खों ने वहाँ जहांगीर और नौशहरा की लड़ाइयो में पठानों को करारी हार दी और पेशावर राज्य पर जीत प्राप्त कर ली। महाराजा की अगवाई में ई॰ 1834 में पेशावर को पूर्ण सिक्ख साम्राज्य में सम्मलित कर लिया गया।

लद्दाख की विजय (ई॰ 1836)
ई॰ 1836 में महाराजा रणजीत सिंह के सिक्ख सेनापति जोरावर सिंह ने लद्दाख पर आक्रमण किया और लद्दाखी सेना को हरा कर के लद्दाख पर आधिपत्य हासिल कर लिया|

महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु
भारतीय इतिहास में अपनी जगह बनाने वाले प्रचंड पराक्रमी महाराजा रणजीत सिंह 58 साल की उम्र में सन 1839 में मृत्यु को प्राप्त हुए। उन्होने अपने अंतिम साँसे लाहौर में ली थी। सदियों बाद भी आज उन्हे अपने साहस और पराक्रम के लिए याद किया जाता है। सब से पहली सिख खालसा सेना संगठित करने का श्रेय भी महाराजा रणजीत सिंह को जाता है। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र महराजा खड़क सिंह ने उनकी गद्द्दी संभाली।...!!

अब सरकार को नैतिकता के आधार पर अकबर और हरकाबाई की कहानी के अलावा,जीता हुआ इतिहास भी पढ़ाना चाहिए..!!

#देC_जा8
- akki Durgapuria 💖💪👊
संगठन युवा शक्ति ( 1 man Army )

  #देC_जा8- akki Durgapuria 💖 💪 👊
11/01/2017


#देC_जा8
- akki Durgapuria 💖 💪 👊

Address

2834 Fairmont Avenue
Holliday, TX
65258

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Akki Durgapuria posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Akki Durgapuria:

Share

Category