03/30/2023
सभी देशवासियों को राम नवमी एवम दुर्गा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
रामनवमी हमारी भारतीय संस्कृति के शिखर-पुरूषों में एक श्री राम का जन्मदिन है। इस बात पर बहस होती रही है कि राम मिथक थे अथवा इतिहास, लेकिन हमारी हजारों साल लंबी सांस्कृतिक परंपरा में वे ऐसे पहले व्यक्ति जरुर थे जिन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहा गया। वे एक प्रखर योद्धा भी थे, अप्रतिम शासक भी और एक शालीन व्यक्तित्व भी। ऐसे पहले व्यक्ति जिनपर अपने समय के उच्चतम जीवन मूल्यों के आचरण के लिए देवत्व आरोपित किया गया। जिन पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को उन्होंने जिया, उनकी मिसालें आज भी दी जाती हैं। उनकी शासन-व्यवस्था रामराज्य को आज भी शासन का आदर्श माना जाता है। राम ऐसे पहले व्यक्ति थे जिनके जीवन पर महर्षि बाल्मीकि के रामायण और तुलसीदास के रामचरित मानस के अलावा देश और विदेश की कई भाषाओं में महाकाव्य रचे गए। राम भारत में ही नहीं, नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया सहित विश्व के कई देशों में आदर्श के रूप में पूजे जाते हैं।
आधुनिक समय में उनके कुछ कृत्यों के लिए राम को कठघरे में भी खड़ा किया जाता है। ऐसा इसीलिए है क्योंकि राम का मूल्यांकन हम आधुनिक, लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर कसकर करते हैं। राम की जो सीमाएं दिखती हैं, वे सीमाएं राम की नहीं, तत्कालीन जीवन मूल्यों, परंपराओं और स्थापित शासकीय आदर्शों की थीं। अपनी तमाम करुणा, प्रेम और मानवीयता के बावज़ूद राम परंपराओं और राजकीय मर्यादाओं के पार नहीं जा सके। समय बदला तो द्वापर युग मे कृष्ण ने अपने समय के धार्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों का बार-बार अतिक्रमण भी किया और समाज द्वारा अपनी नई स्थापनाओं को मान्यता भी दिलाई। किसी ऐतिहासिक या पौराणिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन उसके समय के सापेक्ष ही किया जाना चाहिए।