12/08/2026
उस रोज मेरा परिचय उस समंदर से हुआ,प्रेम में स्वतंत्रता को उस शाम मैंने महसूस किया।मैंने देखा समंदर अपनी किसी भी लहर पर पाबंदी नहीं लगाता, वह उन्हें किसी सीमाओं में नहीं बांधता।.... वह अथाह प्रेम करता है अपनी लहरों से, वह उन्हें उन्मुक्तता से किनारे पर आगे बढ़ते हुए देखता है। वह इस बात की चिंता से मुक्त है कि,... अगर कोई लहर वापस ना आई तो!..वह उन्हें जाने देता है।
मैंने सीखा उस समंदर से कि,.. मुझे अब किसी को नहीं रोकना है। मुझे भी सागर सा मजबूत प्रेमी होना है, अपने रिश्तों की लहरों का एक ईमानदार इंतजार करना है, मुझसे दूर जाने वाली हर लहर(रिश्ते) की वापसी का, और विदाई की बेला में प्रार्थना करनी है कि, मुझसे दूर जाने वाली हर लहर को किनारा नसीब हो!......
उदय_✍️