17/01/2026
कोर्ट ने दी मंजूरी
ये हैं गाजियाबाद के हरीश राणा, जो 12 साल पहले चंडीगढ़ में बी.टेक की पढ़ाई करने गए थे वहां चौथी मंजिल से गिर गये तब उन्हें सर पर चोट लगी और वो कोमा में चले गए.. चंडीगढ़, दिल्ली हर जगह इलाज हुआ लेकिन वो कोमा से बाहर नहीं आए..12 साल से मां बाप उनका इलाज कर रहे अब इच्छा मृत्यु की मांग सरकार से की, सरकार ने सारे पहलू देखते हुए उनकी मांग मान ली।
अब कुछ लोग का कहना है नहीं उनको जिन्दा रखना चाहिए जब तक भगवान सांस दिए हैं। अपने घर में अगर 12 दिन कोई बिस्तर पकड़ ले ना तो लोग इलाज करने में घबरा जाते ये बुढ़े मां बाप कब तक साथ दें। वो भी मरने वाले कगार पर हैं कौन करेगा सेवा, फैमिली में आजकल पति-पत्नी एक दूसरे का करते नहीं, भाई परिवार कौन करता। हो सकता मेरी बात बुरी लगे अस्पताल का खर्च, 24 घंटे एक आदमी किसी से संभव नहीं..
भगवान ऐसी हालत किसी को ना दें लेकिन ऐसे में उनका फैसला सही है, पुरे शरीर पर सूई चुभाए रखना, पाइप का जाल पुरे शरीर लिपटा है वो खुद भी नहीं चाहते होंगे कि जिंदा रहे...
बाकी आप अपनी राय दें सकते....
बाकी मेरा तो यही मानना है कि कोई भी मां-बाप ये भी नहीं चाहता कि उसके औलाद को थोड़ी सी कोई आंच भी आए यह तो मामला ही इच्छा मृत्यु का है।