Himachal Pradesh Yogasana Sport's Association

Himachal Pradesh Yogasana Sport's Association Himachal Pradesh Yogasnana Sports Association Registered under H.P.

Registration Act 2006, Affiliated to Yogasana Bharat - Associate Member of Indian Olympic Association, Recognized by Ministry of Youth Affairs and Sports, Government of India.

30/08/2026
रक्षाबंधन: सिर्फ राखी बांधने का पर्व नहीं, प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प की सदियों पुरानी परंपराजानिए क्यों मनाया जा...
28/08/2026

रक्षाबंधन: सिर्फ राखी बांधने का पर्व नहीं, प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प की सदियों पुरानी परंपरा

जानिए क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण-द्रौपदी से लेकर मां लक्ष्मी-राजा बलि तक की प्रसिद्ध कथाएं

शिमला। भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में रक्षाबंधन का विशेष स्थान है। यह पर्व भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। सावन मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती है। बदले में भाई अपनी बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।

Raksha Bandhan’ का अर्थ ही ‘रक्षा का बंधन’ है। समय के साथ यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित न रहकर परिवार, मित्रों और समाज में आपसी विश्वास, सहयोग और स्नेह का संदेश देने वाला पर्व बन गया है।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?

रक्षाबंधन का मूल भाव है—रिश्तों की रक्षा, विश्वास और जिम्मेदारी। राखी का धागा छोटा जरूर होता है, लेकिन इसके पीछे जुड़ी भावनाएं बेहद गहरी हैं।

बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो वह केवल एक धागा नहीं बांधती, बल्कि अपने भाई के प्रति प्रेम और शुभकामना व्यक्त करती है। भाई भी अपनी बहन के सुख-दुख में साथ खड़े रहने तथा उसकी सुरक्षा और सम्मान के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेता है।

आज के समय में इस पर्व का अर्थ और भी व्यापक हो गया है। यह हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता, सम्मान और सहयोग से मजबूत होते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी 2026 में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में इसे परिवार और समाज के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग मजबूत करने वाला पर्व बताया।

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श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे लोकप्रिय धार्मिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा प्रमुख है।

मान्यता के अनुसार एक अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई और रक्त निकलने लगा। द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह और अपनत्व से श्रीकृष्ण अत्यंत भावुक हुए और उन्होंने उनकी रक्षा का संकल्प लिया।

बाद में महाभारत के प्रसिद्ध चीरहरण प्रसंग में श्रीकृष्ण द्वारा द्रौपदी की लाज बचाने की कथा को इसी भाव से जोड़ा जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण की उंगली पर कपड़ा बांधने और उसे वर्तमान राखी परंपरा से सीधे जोड़ने वाली बात लोकप्रिय धार्मिक परंपरा है; इसे रक्षाबंधन की ऐतिहासिक उत्पत्ति का प्रमाण नहीं माना जाता।

इस कथा का मूल संदेश है—सच्चे स्नेह और छोटे से सहयोग का भी रिश्ता बहुत बड़ा हो सकता है।

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मां लक्ष्मी और राजा बलि की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और राजा बलि से संबंधित है।

मान्यता है कि भगवान विष्णु राजा बलि के आग्रह पर उनके साथ पाताल लोक में रहने लगे। भगवान विष्णु के लंबे समय तक वापस न आने से माता लक्ष्मी चिंतित हुईं। इसके बाद माता लक्ष्मी ने एक ब्राह्मण महिला का रूप धारण कर राजा बलि को राखी बांधी।

राजा बलि ने राखी का सम्मान करते हुए उनसे उपहार मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने साथ वापस भेजने की इच्छा व्यक्त की। राजा बलि ने राखी के बंधन का सम्मान करते हुए उनकी इच्छा स्वीकार की और भगवान विष्णु को उनके साथ जाने दिया।

यह कथा बताती है कि रक्षा सूत्र केवल खून के रिश्ते का बंधन नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान का प्रतीक भी हो सकता है।

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इंद्र और इंद्राणी की कथा भी है प्रसिद्ध

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य प्राचीन मान्यता देवराज इंद्र और उनकी पत्नी इंद्राणी से संबंधित है।

कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दौरान देवताओं की स्थिति कमजोर हो गई थी। तब इंद्राणी ने धार्मिक विधि और मंत्रों के साथ एक पवित्र रक्षा सूत्र तैयार किया और इंद्र की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र ने युद्ध में विजय प्राप्त की।

रक्षाबंधन की प्राचीन परंपरा से जुड़ी इस कथा का उल्लेख भविष्य पुराण से संबंधित परंपराओं में मिलता है।

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कर्णावती और हुमायूं की कहानी कितनी ऐतिहासिक है?

रक्षाबंधन से जुड़ी चर्चित ऐतिहासिक कहानियों में मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुगल सम्राट हुमायूं की कथा भी सुनाई जाती है।

लोकप्रिय कथा के अनुसार रानी कर्णावती ने संकट के समय हुमायूं को राखी भेजकर सहायता का अनुरोध किया था। इस कहानी को अक्सर राखी के उस व्यापक अर्थ के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिसमें रक्षा का संबंध केवल परिवार से नहीं बल्कि विश्वास और मानवीय संबंधों से भी हो सकता है।

हालांकि, इस प्रसंग के ऐतिहासिक विवरण और उसकी प्रामाणिकता को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। इसलिए इसे लोकप्रिय ऐतिहासिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत करना अधिक उचित है।

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राखी की थाली में क्या होता है?

रक्षाबंधन के दिन राखी की थाली को विशेष रूप से सजाया जाता है। इसमें सामान्यतः राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और पूजा की सामग्री रखी जाती है।

बहन भाई को तिलक लगाकर आरती करती है और उसकी कलाई पर राखी बांधती है। इसके बाद भाई बहन को उपहार देता है और उसके सुख-दुख में साथ रहने का संकल्प व्यक्त करता है।

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आज के समय में रक्षाबंधन का संदेश

रक्षाबंधन की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह पर्व हमें रिश्तों को निभाने की सीख देता है।

आज भाई-बहन अलग-अलग शहरों और देशों में रहते हैं। कई बार व्यस्त जीवन के कारण परिवार के सदस्यों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम हो जाता है। ऐसे में रक्षाबंधन रिश्तों को फिर से याद करने, साथ बैठने और अपनेपन को महसूस करने का अवसर देता है।

यह पर्व हमें यह भी संदेश देता है कि महिलाओं का सम्मान, परिवार की सुरक्षा, बच्चों की देखभाल और समाज में आपसी सहयोग केवल एक दिन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे जीवन की जिम्मेदारी है।

राष्ट्रपति के 2026 के संदेश में भी रक्षाबंधन को परिवार और समुदायों के बीच संबंध मजबूत करने तथा विश्वास, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग को बढ़ाने का अवसर बताया गया है।

राखी का धागा छोटा है, लेकिन संदेश बहुत बड़ा है

रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि रिश्तों की असली ताकत महंगे उपहारों में नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान, प्रेम और मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने में है।

श्रीकृष्ण-द्रौपदी की कथा हो, लक्ष्मी-बलि की पौराणिक मान्यता हो या इंद्र-इंद्राणी की कथा—इन सभी में एक समान संदेश दिखाई देता है: स्नेह से बना बंधन व्यक्ति को सुरक्षा, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ता है।

इसीलिए रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने, परिवार को जोड़ने और समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का पर्व है।

आइए, इस रक्षाबंधन पर केवल राखी न बांधें—बल्कि अपने रिश्तों में विश्वास, सम्मान और अपनापन भी बांधें।

**रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय हिन्द!**

🇮🇳 80वां स्वतंत्रता दिवस | 15 अगस्त 2026 🇮🇳🇮🇳 “आपका साथ, HPYSA की उड़ान” 🇮🇳हिमाचल प्रदेश योगासन खेल संघ (HPYSA) को नई ऊँ...
15/08/2026

🇮🇳 80वां स्वतंत्रता दिवस | 15 अगस्त 2026 🇮🇳

🇮🇳 “आपका साथ, HPYSA की उड़ान” 🇮🇳

हिमाचल प्रदेश योगासन खेल संघ (HPYSA) को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन और समर्पण देने वाले सभी साथियों को 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 🙏🇮🇳

आप सभी का सहयोग, विश्वास और समर्पण ही HPYSA की वास्तविक शक्ति है। योगासन खेल को हिमाचल प्रदेश में और अधिक मजबूती एवं ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए आपका योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहेगा। 🧘‍♂️🇮🇳

🌟 विशेष आभार एवं शुभकामनाएँ:
🔹 Sh. Vinod – Nodal Officer, HPYSA
🔹 Sh. Satish Sharma – Legal Advisor, HPYSA
🔹 Sh. Nekram Walia – Core Committee Head, HPYSA
🔹 Sh. Ajay Sharma – Technical Director, HPYSA
🔹 Sh. Lucky Walia – I.T., Media Head & TSR, HPYSA

आप सभी के सहयोग और प्रयासों के लिए हार्दिक धन्यवाद। 🙏

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प लें कि हम मिलकर योगासन खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँगे और हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर और गौरवान्वित करेंगे। 🇮🇳🧘‍♂️

जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्! 🇮🇳
योगासन खेल — स्वस्थ हिमाचल, सशक्त भारत!

Dr. Vivek Sood
State Secretary General, HPYSA

#योगासन #स्वतंत्रतादिवस #हिमाचलप्रदेश िंद #वंदे_मातरम्

🇮🇳 हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ 🇮🇳स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में माननीय मुख्यमंत्री,...
15/08/2026

🇮🇳 हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ 🇮🇳

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा द्वारा हरियाणा योग आयोग के चेयरमैन डॉ. जयदीप आर्य जी को योग के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट एवं सराहनीय योगदान के लिए हरियाणा राज्य पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हिमाचल प्रदेश योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन की ओर से हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ। 🙏🇮🇳

गुरु जी, यह सम्मान केवल आपका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण योग जगत के लिए गौरव का विषय है। आपका समर्पण, मार्गदर्शन एवं योग के प्रचार-प्रसार के प्रति निरंतर प्रयास हम सभी के लिए प्रेरणादायी हैं। 🧘‍♂️🌿

आपके मार्गदर्शन में योग और योगासन खेल निरंतर नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें तथा समाज में स्वस्थ शरीर, स्वस्थ विचार और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश और अधिक प्रभावी रूप से पहुँचे—इसी मंगलकामना के साथ। 🙏

🇮🇳 जय हिन्द | जय भारत 🇮🇳

🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳80वें स्वतंत्रता दिवस — 15 अगस्त 2026 के पावन अवसर पर,Himachal Pradesh Yogasana Sport's Associa...
15/08/2026

🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳 जय भारत 🇮🇳

80वें स्वतंत्रता दिवस — 15 अगस्त 2026 के पावन अवसर पर,
Himachal Pradesh Yogasana Sport's Association (HPYSA) की ओर से हमारे संगठन की नींव और शक्ति—सभी जिलों के सम्मानित District Presidents, Secretaries एवं अन्य सभी पदाधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। 🇮🇳❤️

आप सभी का समर्पण, सहयोग और संगठन के प्रति निष्ठा ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम एकता, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ें और Yogasana Sports को हिमाचल प्रदेश में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। 🧘‍♂️🇮🇳

एक संगठन — एक परिवार — एक संकल्प।
राष्ट्र सर्वोपरि 🇮🇳

❤️ वंदे मातरम्!
🇮🇳 जय हिन्द | जय भारत 🇮🇳

#स्वतंत्रतादिवस

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15/07/2026

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