19/04/2026
“कभी खुद पर शक था, आज सफ़र पर यक़ीन है।”
DDR ग्रुप, द्वारका के लिए यह सिर्फ़ एक मैसेज नहीं, दिल से निकली हुई कृतज्ञता है।
मैं अक्सर आप सबको दौड़ते हुए देखती थी… मन में एक सवाल आता था—क्या मैं भी कभी ऐसे दौड़ पाऊँगी?
फिर एक दिन, वैंकटेश्वर स्कूल के सामने वाले पार्क में आप सबसे मुलाकात हुई… और वही दिन मेरे सफ़र की शुरुआत बन गया।
शुरुआत छोटी थी—सिर्फ़ 3 किलोमीटर।
लेकिन आपने जो हौसला दिया, जो अपनापन दिया, उसने कदमों को रुकने नहीं दिया।
इस साल मैंने 3 बार 5 किलोमीटर पूरे किए—और हर बार ऐसा लगा जैसे मैं खुद से एक नई मुलाकात कर रही हूँ।
“रास्ते वही रहते हैं, बदलते हैं तो बस चलने वाले कदम।”
एक टीचर होने के नाते मैं बच्चों को हमेशा सिखाती हूँ कि सीखना कभी रुकना नहीं चाहिए,
और एक लेखिका व इलस्ट्रेटर होने के नाते मैं कहानियाँ बनाती हूँ…
लेकिन DDR के साथ, मैंने अपनी ही एक नई कहानी जी है—हिम्मत, अनुशासन और विश्वास की कहानी।
आप सबने मुझे सिर्फ़ दौड़ना नहीं सिखाया,
बल्कि खुद पर भरोसा करना भी सिखाया।
“जहाँ साथ हो सच्चा, वहाँ हर मंज़िल आसान लगती है।”
दिल से धन्यवाद, इस खूबसूरत सफ़र का हिस्सा बनाने के लिए।
— jasmine