18/11/2016
Amid all the chaos, this is called humanity.
Via- तर्कसंगत - Tarksangat
'उत्तर प्रदेश के एक किसान 100 और 50 की नोट में बचाई अपनी आधी कमाई को जमा कराने बैंक पहुँचे, कहा शायद इससे लोगों की मदद हो जाए'
500-1000 के नोट बंद होने के बाद देश भर के सभी बैंकों और एटीएमों के आगे लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, कोई पैसे जमा करने के लिए खड़ा है तो कोई पैसे निकालने के लिए। हर कोई अपने पुराने 500-1000 के नोटों से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहता है पर क्या आप सोच सकते हैं कि इस अफ़रा-तफ़री में कोई बैंक में 100 और 50 के नोट जमा कराने जाएगा, यकीन नहीं होता है ना? पर सहारनपुर के पिंजौरा निवासी शिवकुमार ने ऐसा ही किया और लोगों की नज़र में नायक बन गए।
शिवकुमार जी एक छोटे से किसान हैं, नोटबंदी की ख़बरें उन्हें परेशान कर रही थीं, वो लोगों की तकलीफ़ों और परेशानियों को सुनकर दुखी थे। रविवार को वो लोगों की मदद करने दिल्ली रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की आवास विकास शाखा में पहुँच गए। उनके पास 100 और 50 की नोट थीं, जिनको वो बैंक में जमा करने गए थे। उनके इस छोटे से प्रयास को देखकर वहाँ मौजूद लोग हैरान रह गए, बैंक मैनेजर अपनी कुर्सी छोड़कर खड़े हो गए। शिवकुमार जी के लिए कुर्सी मँगाई गई और उन्होंने मैनेजर के कक्ष में ही फार्म भरा और पैसे जमा किये।
शिवकुमार जी एक किसान हैं, उनके पास बचत के कुछ पैसे थे, जो 100-50 की नोट में थे, उन्होंने बचत का आधा पैसा परिवार के खर्च के लिए रख लिया और बाकी का बैंक में इसलिए जमा कर दिया ताकि लोगों की मदद हो सके। बैंक मैनेजर का कहना था कि यदि शिवकुमार जैसे और लोग हों तो इस समस्या का आसानी से समाधान हो जाएगा और लोगों को तकलीफ़ भी नहीं होगी।
तर्कसंगत सलाम करती है शिवकुमार जी के सेवाभाव और लोगों की मदद करने के जज़्बे को। इस वक़्त जब देश के सामने एक चुनौती खड़ी है, ऐसे समय में हम सब को संयम रखना होगा। हम अपने सभी पाठकों से अनुरोध करते हैं कि वो अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अन्य लोगों का भी ध्यान दें, यदि शिवकुमार जी ऐसा कर सकते हैं तो हम और आप क्यों नहीं।