30/03/2026
📢 अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल
क्या ग्रामीण क्षेत्र का बच्चा केवल English Medium में पढ़कर अपना भविष्य सुरक्षित कर सकता है…
जब उसे घर पर अतिरिक्त समय, मार्गदर्शन और माहौल ही नहीं मिल पाता? 🤔
📢 अभिभावकों के लिए सच्चाई जानना जरूरी है 📢
कुछ समय पहले हमने अपने विद्यालय से ऐसे शिक्षकों को हटाया,
जो Hindi Medium के बच्चों को अपेक्षित स्तर पर नहीं पढ़ा पा रहे थे।
आज वही शिक्षक दूसरे संस्थान में जाकर English Medium के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ये सब देख के दुख होता है कि जो बच्चे मजबूत नींव के सहारे अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है कही वो नींव ही खोखली ना रह जाए......
🤔 लेकिन सोचने वाली बात है —
👉 जो शिक्षक बच्चों को हिंदी माध्यम में सही से समझाने में सक्षम नहीं थे
वह “English Medium” के बच्चों को पढ़ा रहे हैं
👉 National Education Policy (NEP 2020) भी यही कहती है कि:
✔ कक्षा 5 (और संभव हो तो 8) तक बच्चों को मातृभाषा / स्थानीय भाषा में शिक्षा देना सबसे प्रभावी होता है
✔ बच्चे अपनी भाषा में जल्दी और गहराई से समझ विकसित करते हैं
✔ मजबूत नींव बनने पर आगे किसी भी भाषा (English सहित) को सीखना आसान हो जाता है
👍 अगर foundation (3–8 साल) मजबूत है तो बच्चा आगे हर field में अच्छा करेगा
👉 सच्चाई यह है कि
गांव के अधिकांश बच्चों को घर पर
❌ पढ़ाई का सही वातावरण नहीं मिलता
❌ गाइड करने वाला कोई नहीं होता
❌ अतिरिक्त समय और संसाधन सीमित होते हैं
❌ अंग्रेजी माध्यम के लिए अच्छे शिक्षकों की कमी
ऐसी स्थिति में अगर बच्चा ऐसी भाषा में पढ़े जिसे वह ठीक से समझ ही न पाए,
तो उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगता है।
📚 मजबूत भविष्य की शुरुआत वहीं से होती है जहाँ बच्चा समझता है।
❗ केवल English Medium का दिखावा,
बिना समझ के, बच्चे के भविष्य को कमजोर कर सकता है।
🙏 अभिभावकों से निवेदन है —
अपने बच्चे के लिए वही माध्यम चुनें
जहाँ वह सीख सके, समझ सके और आगे बढ़ सके।
💯 हमारा विश्वास:
मजबूत नींव ही उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
राधाकृष्ण सी.सै.स्कूल कालियावास काँवट
राधाकृष्ण सी.सै.स्कूल कालियावास कॉवट