18/06/2026
अच्छा लेट #शादी करना भी आज एक status symbol बन गया है, ऊपर से सबको अपनी बेटी के लिए ढंग का लड़का और बेटे के लिए ढंग की लड़की चाहिए
ये अलग बात है कि किसी को भी ढंग के लड़के और ढंग की लड़की की परिभाषा नहीं पता
खोजबीन चलती रहती है, ठीक जोड़ी के चक्कर में रिश्ते टालते रहते हैं और टाल मटोली में इतनी लेट हो जाते हैं कि जो बढ़िया रिश्ते आए थे फाइनली उनसे भी कमतर जगह अपने बच्चों को ब्याहने के लिए मजबूर हो जाते हैं
और ठीक जोड़ी के पैमाने भी सबके ऐसे अव्यवहारिक होते हैं जिनका एक सुखी गृहस्थी से कोई लेना देना नहीं होता
जैसे सब्जी (घीया तोरी टिंडा भिंडी) पक जाती है तब उसे कोई नहीं खरीदता वैसे ही एक समय आता है जब लड़का लड़की पक जाते हैं और तब उसे देखते ही रिश्ते वाले नाक चढ़ाने लगते हैं
लेट रिश्ते (शादी) शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव छोड़ते हैं, चेहरे का नूर गायब हो जाता है, शरीर के यौवन का पीक time जा चुका होता है
लेकिन यहां यौवन की फिक्र किसे है, शुरुआती दौर में जब रिश्तों की line लगती है तब सबका मुंह आसमान में होता है, उस समय सब रिश्तों की सौदेबाजी कर रहे होते हैं, रिश्ते आना उस समय उनके लिए ट्रायल का हिस्सा होता है
कितना ही बढ़िया रिश्ता उस समय आ जाओ मना करने से मतलब होता है, उस समय उनके reply होते 👉🏼 जी अभी उम्र ही क्या हुई है बच्चे की, अभी इसने देखा ही क्या है, अभी तो इसकी पढ़ाई बाकी है, बच्चा अभी मना कर रहा है, अभी ये फलाने exam की तैयारी में है, आजकल कौन बच्चों को जल्दी ब्याहता है
शायद आपको बात अटपटी लगे लेकिन ये कड़वी हकीकत है कि जब तक बच्चों को ब्याहया जाता है तब तक या तो वे कहीं ना कहीं फिजिकली कनैक्ट हो चुके होते हैं या फिर फिर उनकी फिजिकल इच्छाएं मर चुकी होती हैं और कई मामलों में उनकी फिजिकल कैपेबलटी कमजोर पड़ चुकी होती है जिसकी वजह से बाद में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर जैसी संस्कृति का जन्म होता है
मखा वाह रै मॉडर्न घोंचूनाथ लोगो 😏