29/08/2025
❄️ बर्फ पर जज़्बे की गूंज : भारत की महिला आइस हॉकी टीम 🇮🇳
जब बात खेलों की होती है, तो अक्सर क्रिकेट और हॉकी (फ़ील्ड) ही हमारे ज़हन में आते हैं। लेकिन ऊँचे पहाड़ों और बर्फ़ीली झीलों के बीच एक ऐसा खेल भी पनप रहा है, जिसने दुनिया को चौंका दिया—आइस हॉकी। और इस खेल में भारत की महिला आइस हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है।
🌟 टीम का परिचय
• कप्तान (Captain): त्सेवांग चुश्कित (फॉरवर्ड, लेह लद्दाख के Tangtse गाँव से)
• वाइस-कप्तान (Vice Captain): देचेन दोलकर (फॉरवर्ड, लद्दाख)
टीम में कुल 20 सदस्य हैं, जिनमें लगभग आधी खिलाड़ी इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) से आती हैं, और बाकी ज्यादातर का घर लद्दाख है। एक खिलाड़ी हिमाचल प्रदेश से भी जुड़ी हैं।
🏑 पोज़िशन आधारित रोस्टर
• फॉरवर्ड (Forward): स्टैंज़िन दोलकर, ताशी दोलकर, सोनम आंग्मो, स्कर्मा रिनचेन (Gya Meru, Ladakh), डिस्कित छोंज़ोम आंग्मो (Leh), रिनचेन दोल्मा, पंचोक दोल्मा, तांज़िन साल्डन, पद्मा दोलकर, पद्मा छोरोल
• डिफेंडर (Defender): रिगज़िन यांगदोल, शारप यांगशेट, शेरप ज़ंग्मो, स्टैंज़िन छोस्त्यो, सोनम आंग्मो, स्टैंज़िन ज़ंग्मो
• गोलकीपर (Goalkeeper): दोरजय दोल्मा, पद्मा ल्हुंडुप
इसके अलावा समीना खातून (त्रेस्पोन गाँव, कारगिल) जैसी युवा खिलाड़ी भी इस सफ़र में नई उम्मीद जगाती हैं।
🏔️ लोकेशन और जड़ें
टीम की जड़ें लद्दाख की बर्फ़ीली वादियों में हैं—जहाँ जमी हुई झीलें प्राकृतिक “रिंक” का काम करती हैं। इन खिलाड़ियों ने उन्हीं झीलों पर बचपन में बिना ढंग के उपकरणों के अभ्यास शुरू किया।
• त्सेवांग चुश्कित और उनकी साथी अक्सर स्कूल के बाद बर्फ़ीली झीलों पर अभ्यास करती थीं।
• स्कर्मा रिनचेन जैसी खिलाड़ी चरवाहा परिवार से हैं, जिन्होंने कठिन हालात के बावजूद खेल में अपना नाम बनाया।
• समीना खातून कारगिल जैसे दूरदराज़ क्षेत्र से आकर पहली महिला खिलाड़ी बनीं।
💪 मेहनत और समर्पण
इस टीम की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत और समर्पण है।
• इन्हें कई बार “घर जाओ, माँ बनो” जैसी बातें सुननी पड़ीं, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
• सीमित साधनों—पुराने स्टिक, सेकंड-हैंड स्केट्स और साधारण यूनिफ़ॉर्म—के बावजूद, इन्होंने अपना जुनून नहीं छोड़ा।
• कई खिलाड़ी ITBP जैसी सेवा में हैं, दिन में ड्यूटी और रात को अभ्यास—यह उनका रूटीन है।
🏆 ऐतिहासिक उपलब्धि
2025 में, IIHF Women’s Asia Cup (अल-ऐन, UAE) में भारत की महिलाओं ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर दुनिया को दिखा दिया कि बर्फ़ पर भी भारत का जज़्बा चमक सकता है।
यह जीत सिर्फ़ एक मेडल नहीं थी, बल्कि उन तमाम लड़कियों के सपनों की जीत थी जो बड़े शहरों से दूर पहाड़ों में खेल का सपना देखती हैं।
🌈 संदेश
भारत की महिला आइस हॉकी टीम हमें यह सिखाती है कि—
अगर हिम्मत और मेहनत हो, तो बर्फ़ जैसी मुश्किल ज़मीन भी सपनों की स्लाइडिंग रिंक बन सकती है।
ये खिलाड़ी सिर्फ़ खेल नहीं रही हैं, बल्कि पूरे देश के लिए नई पहचान गढ़ रही हैं।