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क्रिकेट क्रॉनिकल्स | क्रिकेट की कहानी
क्रिकेट की भावना का जश्न—दिग्गजों से लेकर गुमनाम नायकों तक। आँकड़े, कहानियाँ और भावनाएँ जो सीमाओं से परे जाती हैं।
दुर्लभ तथ्य | ऐतिहासिक क्षण | वैश्विक और सहयोगी राष्ट्र | दिल को छू लेने वाली हिंदी पोस्ट। Cricket देशी वाला | जहाँ आंकड़े मिलते हैं जज़्बे से, और हर पोस्ट में होती है विरासत की बात*
हम सिर्फ क्रिकेट की बात नहीं करते—हम उसकी आत्मा को महसूस करते है

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यह पेज समर्पित है उन खिलाड़ियों को जिन्होंने मैदान पर पसीना बहाया, चाहे वो चमकते सितारे हों या वो अनसुने हीरो जिनकी कहानियाँ अब तक छुपी थीं।

📜क्या मिलेगा यहाँ?
- भावनात्मक और तथ्यपूर्ण ट्रिब्यूट पोस्ट
- देसी अंदाज़ में क्रिकेट की ऐतिहासिक झलकियाँ
- हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी में बहुभाषी स्टोरीटेलिंग
- पोस्टर डिज़ाइन, कैप्शन क्राफ्टिंग और सांस्कृतिक श्रद्धांजलियाँ
- Ranji से लेकर World Cup तक—हर कोने की कहानी

🎯 हमारा मकसद:
क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं, एक विरासत की तरह पेश करना।
हर आंकड़ा, हर रिकॉर्ड, हर तस्वीर—एक जज़्बे की कहानी कहती है।

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लॉर्ड्स का शहंशाह, वेस्टइंडीज़ के खूंखार पेस अटैक का काल और भारतीय क्रिकेट का 'कर्नल'! ​1970 और 80 के दशक में जब वेस्टइं...
08/08/2026

लॉर्ड्स का शहंशाह, वेस्टइंडीज़ के खूंखार पेस अटैक का काल और भारतीय क्रिकेट का 'कर्नल'! ​1970 और 80 के दशक में जब वेस्टइंडीज़ के आक्रामक और तेज़ गेंदबाज़ दुनिया भर के बल्लेबाज़ों में खौफ़ पैदा करते थे, तब भारत के लिए नंबर-3 पर आकर सीना ठोककर क्रीज़ पर डटने वाले बल्लेबाज़ थे दिलीप वेंगसरकर (Dilip Vengsarkar)!

​अपनी शानदार ड्राइव्स, गज़ब के संतुलन और क्रीज़ पर अपनी दबदबे वाली शैली के कारण उन्हें प्यार से 'कर्नल' (Colonel) कहा जाता था। जब वे अपनी लय में होते थे, तो दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ उन्हें रन बनाने से नहीं रोक पाता था।

​दिलीप वेंगसरकर की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:

लॉर्ड्स (Lords) के मैदान पर हैट्रिक शतक: क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर लगातार तीन टेस्ट मैचों (1979, 1982, 1986) में तीन शतक जड़ने वाले वे दुनिया के एकमात्र विदेशी बल्लेबाज़ हैं!

10,000+ अंतर्राष्ट्रीय रन और 17 टेस्ट शतक: 116 टेस्ट मैचों में 42.13 की औसत से 6,868 रन (17 शतक) और 129 वनडे मैचों में 3,508 रन बनाए।

1986 में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ (ICCI Ranking No.1): 1986-87 के दौर में वे अपने करियर के चरम पर थे और आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ बने थे।

1983 विश्व कप विजेता टीम के मुख्य सदस्य: कपिल देव की कप्तानी में 1983 का ऐतिहासिक वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का वे एक बेहद अहम हिस्सा थे।

1986 की ऐतिहासिक इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ जीत: 1986 में इंग्लैंड की सरज़मीं पर 2-0 से टेस्ट सीरीज़ जीतने में उन्होंने लगातार शतकीय पारियाँ खेलकर 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' का ख़िताब जीता था।

​लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उनका वो महारिकॉर्ड, विदेशी धरती पर दबाव में शतक ठोकना और भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बनना— 'कर्नल' के बेजोड़ क्रिकेट सफर की पहचान है!

​लॉर्ड्स में उनके लगातार तीन शतक या वेस्टइंडीज़ के पेसर्स के ख़िलाफ़ उनकी निडर बल्लेबाज़ी— दिलीप वेंगसरकर की कौन सी याद आपके दिल में सबसे ताज़ा है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

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8 अगस्त 2015—ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड ने 3 दिनों में जीती एशेज! ब्रॉड के 8/15 और क्लार्क के संन्यास की घोषणा! 8 अगस्त 2...
08/08/2026

8 अगस्त 2015—ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड ने 3 दिनों में जीती एशेज! ब्रॉड के 8/15 और क्लार्क के संन्यास की घोषणा! 8 अगस्त 2015 को ट्रेंट ब्रिज (Trent Bridge) में खेले गए चौथे एशेज टेस्ट में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को एक पारी और 78 रनों से करारी शिकस्त देकर एशेज सीरीज पर पुनः कब्जा जमाया। 2013-14 में ऑस्ट्रेलिया में 0-5 की शर्मनाक हार झेलने के बाद इंग्लैंड का यह वापसी भरा प्रदर्शन अद्भुत था।

स्टुअर्ट ब्रॉड का विनाशकारी स्पैल (8/15) और क्लार्क के संन्यास का ऐलान:

18.3 ओवर में ऑस्ट्रेलिया 60 पर ढेर: मैच के पहले ही दिन स्टुअर्ट ब्रॉड (Stuart Broad) ने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए महज़ 15 रन देकर 8 विकेट (8/15) चटकाए। पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम सिर्फ 18.3 ओवरों में 60 रनों पर सिमट गई, जो टेस्ट इतिहास में किसी भी टेस्ट की सबसे छोटी पहली पारी थी।

रूट और बेयरस्टो का करारा जवाब: जो रूट (130) के शानदार शतक और जॉनी बेयरस्टो (74) की उपयोगी पारी की बदौलत इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी 391/9 पर घोषित की और 331 रनों की विशाल बढ़त हासिल की।

बेन स्टोक्स का पंजा: दूसरी पारी में बेन स्टोक्स (Ben Stokes) ने 6 विकेट (6/36) झटकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ दी और तीसरे दिन की शुरुआत में ही मैच खत्म कर दिया।

माइकल क्लार्क का संन्यास: इस शर्मनाक हार के बाद आलोचनाओं से घिरे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क (Michael Clarke) ने घोषणा की कि द ओवल (The Oval) में खेला जाने वाला पाँचवाँ टेस्ट उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आख़िरी मैच होगा।

ट्रेंट ब्रिज का यह मुक़ाबला स्टुअर्ट ब्रॉड की ऐतिहासिक गेंदबाज़ी और एशेज इतिहास की सबसे यादगार वापसी के लिए हमेशा याद रखा जाएगा!

क्या डोमेस्टिक क्रिकेट के रनों की अब कोई कीमत नहीं रही? ​साईं सुदर्शन के इंजर्ड होकर बाहर होने के बाद सवाल ये उठ रहा है ...
08/08/2026

क्या डोमेस्टिक क्रिकेट के रनों की अब कोई कीमत नहीं रही? ​साईं सुदर्शन के इंजर्ड होकर बाहर होने के बाद सवाल ये उठ रहा है कि अब टेस्ट टीम में जगह किसकी बनेगी? कायदे से और आंकड़ों के हिसाब से जो नाम सबसे ऊपर होना चाहिए, वह है सरफराज खान का। First-Class क्रिकेट में 60+ का औसत, रेड बॉल हो या व्हाइट बॉल—हर फॉर्मेट में लगातार रनों का पहाड़ खड़ा करने के बावजूद सरफराज को लगातार साइडलाइन किया जा रहा है।

​जब डोमेस्टिक क्रिकेट में सालों तक कंसिस्टेंट परफॉर्मेंस देने वाले खिलाड़ियों को दरकिनार कर दिया जाता है, तो सवाल उठना लाजमी है। क्या अब टीम इंडिया का सिलेक्शन सिर्फ काबिलियत और परफॉर्मेंस के दम पर हो रहा है या फिर पसंद-नापसंद और 'यस मैन' कल्चर हावी हो चुका है? हाल के कुछ सिलेक्शंस को देखकर तो यही लगता है कि मेरिट से ज्यादा तरजीह बाकी चीजों को दी जा रही है।

​आकिब नबी का उदाहरण हमारे सामने है। जब डोमेस्टिक में लगातार 2-3 साल तक शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था, तब भारी दबाव और इंजरी रिप्लेसमेंट के रूप में मजबूरी में ही सही, लेकिन उन्हें मौका देना पड़ा। क्या सरफराज खान के मामले में भी किसी मजबूरी का इंतजार किया जा रहा है?

​देखना दिलचस्प होगा कि साईं सुदर्शन की जगह किसे बुलावा आता है। क्या डोमेस्टिक क्रिकेट के असली हीरो सरफराज खान को उनका हक मिलेगा या फिर मैनेजमेंट के पिटारे से कोई और चौंकाने वाला नाम सामने आएगा?

​आपकी क्या राय है? क्या सरफराज खान को अब भी मौका न देना उनके साथ नाइंसाफी नहीं है? कमेंट्स में अपनी बात जरूर रखें!

चट्टान सी जुझारूपन, एशेज़ का महा-नायक और क्रिकेट कमेंट्री की 'आइकॉनिक आवाज़'! सिल्वर/माइक्रोफ़ोन ​ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इ...
08/08/2026

चट्टान सी जुझारूपन, एशेज़ का महा-नायक और क्रिकेट कमेंट्री की 'आइकॉनिक आवाज़'! सिल्वर/माइक्रोफ़ोन ​ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में जब भी किसी ऐसे सलामी बल्लेबाज़ की बात होती है जिसे क्रीज़ से डिगा पाना नामुमकिन था, तो सबसे पहला नाम बिल लॉरी (Bill Lawry) का आता है!

​अपनी लंबी एकाग्रता, क्रीज़ पर पैर जमाने के चट्टानी जज़्बे और रक्षात्मक तकनीक के कारण उन्हें 'द फ़ैंटम' (The Phantom) कहा जाता था। संन्यास के बाद वे Channel 9 क्रिकेट कमेंट्री की वो बुलंद आवाज़ बने जिसने दशकों तक दुनिया भर के क्रिकेट फैंस को रोमांचित किया!

​बिल लॉरी की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:

5,000+ टेस्ट रन और 13 शतक: 67 टेस्ट मैचों में 47.15 की शानदार औसत से 5,234 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज़ के रूप में उन्होंने बॉब सिम्पसन के साथ मिलकर इतिहास की सबसे मजबूत ओपनिंग जोड़ियों में से एक बनाई।

कप्तानी में बेजोड़ रिकॉर्ड: 25 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की और अपनी टीम को एशेज़ सीरीज़ में कई यादगार जीतें दिलाईं।

डेब्यू एशेज़ सीरीज़ में ही मचाया धमाल (1961): 1961 के इंग्लैंड दौरे पर अपने डेब्यू टेस्ट सीरीज़ में ही 526 रन ठोक दिए थे, जिसमें लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेली गई 130 रनों की जुझारू शतकीय पारी शामिल थी।

प्रथम श्रेणी में 22,000+ रन: 248 प्रथम श्रेणी मैचों में 50.73 की गज़ब की औसत से 22,300 से अधिक रन और 47 शतक जड़े।

पहला वनडे खेलने वाले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान: 1971 में इतिहास का सबसे पहला आधिकारिक वनडे (ODI) मैच खेलने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान बिल लॉरी ही थे!

​मैदान पर गेंदबाज़ों को थकाकर आउट करने का उनका अंदाज़ हो या फिर माइक हाथ में लेकर उनका मशहूर डॉयलॉग "It's all happening at the MCG!"— बिल लॉरी ने खिलाड़ी और कमेंटेटर दोनों रूपों में क्रिकेट को समृद्ध किया!

​क्रीज़ पर उनका चट्टानी संघर्ष या कमेंट्री बॉक्स में उनका आइकॉनिक अंदाज़— बिल लॉरी की कौन सी याद आपके दिल के सबसे नज़दीक है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

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8 अगस्त 1988—द ओवल में वेस्टइंडीज़ की 4-0 से सीरीज़ जीत और इंग्लैंड के 'सफ़ाए' का अंत! ​8 अगस्त 1988 को द ओवल (The Oval)...
08/08/2026

8 अगस्त 1988—द ओवल में वेस्टइंडीज़ की 4-0 से सीरीज़ जीत और इंग्लैंड के 'सफ़ाए' का अंत! ​8 अगस्त 1988 को द ओवल (The Oval) के मैदान पर इंग्लैंड और वेस्टइंडीज़ के बीच खेला गया पाँचवाँ टेस्ट समाप्त हुआ। यद्यपि इंग्लैंड लगातार तीसरे 'ब्लैकवॉश' (5-0 की सीरीज़ हार) से बचने में सफ़ल रहा, लेकिन वेस्टइंडीज़ ने यह सीरीज़ 4-0 के बड़े अंतर से अपने नाम की।

​ग्राहम गूच का कप्तानी डेब्यू, नील फ़ोस्टर का स्पैल और वेस्टइंडीज़ का दबदबा:

ग्राहम गूच की बतौर कप्तान शुरुआत: ग्राहम गूच (Graham Gooch) ने इस मैच से इंग्लैंड के कप्तान के रूप में अपना पहला टेस्ट मैच खेला।

नील फ़ोस्टर की धारदार गेंदबाज़ी: नील फ़ोस्टर (Neil Foster) के शानदार प्रदर्शन के बल पर इंग्लैंड ने पहली पारी में बढ़त हासिल कर ली थी, जिससे लगा कि मैच इंग्लैंड के पक्ष में झुक सकता है।

कमज़ोर इंग्लिश टीम और विव रिचर्ड्स का तूफ़ान: पहली पारी की बढ़त के बावजूद इंग्लैंड इस लय को बनाए नहीं रख सका। उस दौर में इंग्लैंड ने सीरीज़ के दौरान कई खिलाड़ियों (कर्टिस, बेली, मेनार्ड, कैपेल, रिचर्ड्स और चाइल्ड्स) को आज़माया, लेकिन सर विवियन रिचर्ड्स (Sir Viv Richards) की शक्तिशाली वेस्टइंडीज़ टीम के आगे यह अनुभवहीन टीम नहीं टिक सकी।

वेस्टइंडीज़ का वर्चस्व: 4-0 से मिली इस ऐतिहासिक जीत ने 1980 के दशक में दुनिया भर में वेस्टइंडीज़ की क्रिकेट टीम के अविश्वसनीय दबदबे और खौफ़ को एक बार फिर साबित कर दिया था।
​द ओवल का यह टेस्ट वेस्टइंडीज़ के स्वर्ण युग और इंग्लैंड के पुनर्गठन के दौर का एक बड़ा प्रतीक बन गया!

कैरिबियाई पेस अटैक का साइलेंट हीटर, बेजोड़ सटीकता और 1975 विश्व कप जीत का हिस्सा!​1970 के दशक में जब वेस्टइंडीज़ की टीम ...
08/08/2026

कैरिबियाई पेस अटैक का साइलेंट हीटर, बेजोड़ सटीकता और 1975 विश्व कप जीत का हिस्सा!
​1970 के दशक में जब वेस्टइंडीज़ की टीम में माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स और बर्नार्ड जुलिएन जैसे तूफ़ानी गेंदबाज़ों का दबदबा था, तब अपनी नियंत्रित लाइन-लेंथ, उछाल और लगातार एक ही टप्पे पर गेंद डालकर बल्लेबाज़ों को बांधे रखने वाले गेंदबाज़ थे वानबर्न होल्डर (Vanburn Holder)!

​उन्हें कैरिबियाई पेस अटैक का 'वर्कहॉर्स' कहा जाता था— एक ऐसा गेंदबाज़ जो एक छोर को पूरी तरह से कसकर रखता था और दूसरे छोर के गेंदबाज़ों को विकेट मिलने का रास्ता साफ़ करता था।

​वानबर्न होल्डर की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:

1975 वनडे विश्व कप विजेता: 1975 में पहली बार आयोजित हुए आईसीसी क्रिकेट विश्व कप को जीतने वाली वेस्टइंडीज़ की ऐतिहासिक टीम के वे अहम सदस्य थे और ख़िताबी जीत में बड़ा योगदान दिया था।

100+ टेस्ट विकेट और 6/39 का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: 40 टेस्ट मैचों में 109 विकेट चटकाए। 1975 में भारत के ख़िलाफ़ बारबाडोस टेस्ट में केवल 39 रन देकर 6 विकेट चटकाना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।

निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज़: वे केवल गेंदबाज़ ही नहीं थे, बल्कि निचले क्रम में उपयोगी रन भी बनाते थे। 1974 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्होंने टेस्ट मैच में संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए 42 और नाबाद 40* रनों की जुझारू पारियाँ खेली थीं।

प्रथम श्रेणी में 900+ विकेट: काउंटी क्रिकेट (वूस्टरशायर) और घरेलू क्रिकेट में अपनी किफायती और अनुशासित गेंदबाज़ी के दम पर 260 प्रथम श्रेणी मैचों में 920 से अधिक विकेट हासिल किए।
​गेंद को दोनों तरफ़ सीम कराना, लंबी गेंदबाज़ी स्पैल फेंकना और कभी भी अपनी लाइन से न भटकना— वानबर्न होल्डर की सबसे बड़ी खूबी थी!

​1975 विश्व कप की स्वर्णिम जीत या भारत के ख़िलाफ़ उनका 6/39 का घातक स्पैल— वानबर्न होल्डर के बारे में आपकी क्या राय है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

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8 अगस्त 1968—भारतीय तेज़ गेंदबाज़ और बीसीसीआई प्रशासक आबे कुरुविला का जन्म!​आज भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ और बीसीसीआई क...
08/08/2026

8 अगस्त 1968—भारतीय तेज़ गेंदबाज़ और बीसीसीआई प्रशासक आबे कुरुविला का जन्म!​आज भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ और बीसीसीआई के क्रिकेट संचालन महाप्रबंधक (General Manager) आबे कुरुविला (Abey Kuruvilla) का जन्मदिन है! लगभग 6 फीट 6 इंच लंबे कद, ऊँचे रिलीज़ पॉइंट और शानदार बाउंस के लिए पहचाने जाने वाले कुरुविला 1990 के दशक में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण के प्रमुख चेहरा थे।
​बारबाडोस में 5 विकेट और प्रशासक के रूप में नई पारी!

बारबाडोस 1997 का घातक स्पैल (5/68): कुरुविला के करियर का सबसे यादगार प्रदर्शन 1997 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ बारबाडोस (Barbados) टेस्ट में आया। उन्होंने वेस्टइंडीज़ की दूसरी पारी में घातक गेंदबाज़ी करते हुए 68 रन देकर 5 विकेट चटकाए थे और कैरिबियाई बल्लेबाज़ों को संकट में डाल दिया था।

अंतरराष्ट्रीय करियर: उन्होंने 1997 में ही अपना टेस्ट और वनडे डेब्यू किया। भारत के लिए खेले 10 टेस्ट मैचों में उन्होंने 25 विकेट लिए, जबकि 25 वनडे मैचों में भी 25 विकेट हासिल किए।

मुंबई के लिए शानदार घरेलू रिकॉर्ड: घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा, जहाँ उन्होंने 35 प्रथम श्रेणी मैचों में 2.81 की किफायती इकॉनमी से 100 से अधिक विकेट लिए।

चयनकर्ता और बीसीसीआई प्रशासक: संन्यास के बाद वे क्रिकेट प्रशासन में सक्रिय रहे। वे मुंबई रणजी टीम के मुख्य चयनकर्ता, राष्ट्रीय जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष, राष्ट्रीय सीनियर चयनकर्ता और बाद में बीसीसीआई (BCCI) में महाप्रबंधक पद पर रहे।

​अपनी कद-काठी, उछाल भरी गेंदबाज़ी और भारतीय क्रिकेट को अपनी सेवाएँ देने वाले आबे कुरुविला को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

इंग्लैंड क्रिकेट का सबसे कलात्मक बल्लेबाज़, 'कवर ड्राइव' का उस्ताद और 5 बार का एशेज़ चैंपियन!​जब भी क्रिकेट के इतिहास मे...
08/08/2026

इंग्लैंड क्रिकेट का सबसे कलात्मक बल्लेबाज़, 'कवर ड्राइव' का उस्ताद और 5 बार का एशेज़ चैंपियन!​जब भी क्रिकेट के इतिहास में सबसे खूबसूरत, साफ-सुथरी और देखने योग्य बल्लेबाज़ी तकनीक की बात होगी, तो इयान बेल (Ian Bell) का नाम सबसे पहली कतार में आएगा!

​क्रीज़ पर उनका संतुलन, गेंद को देर से खेलने की काबिलियत और उनका वो नयनाभिराम 'कवर ड्राइव' शॉट— किसी भी क्रिकेट प्रेमी के लिए एक अद्भुत दृश्य की तरह होता था।

​इयान बेल की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:

13,000+ अंतर्राष्ट्रीय रन और 26 शतक: टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों को मिलाकर इंग्लैंड के लिए कुल 13,331 रन बनाए (टेस्ट में 7,727 रन और वनडे में 5,416 रन) और 26 अंतर्राष्ट्रीय शतक जड़े।

5 बार एशेज़ सीरीज़ जीतने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: इंग्लैंड क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा दिग्गजों में से एक हैं जिन्होंने 5 बार (2005, 2009, 2010-11, 2013, 2015) ऐतिहासिक एशेज़ ट्रॉफ़ी जीती।

2013 एशेज़ के असली हीरो (Player of the Series): 2013 की एशेज़ सीरीज़ में उन्होंने 3 बैक-टू-बैक शानदार शतक जड़कर 562 रन बनाए थे और अकेले दम पर इंग्लैंड को 3-0 से जीत दिलाई थी।

टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 बनने का सफर: 2011 में जब इंग्लैंड की टीम आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में दुनिया की नंबर-1 टीम बनी थी, तब इयान बेल उस मध्यक्रम के सबसे मजबूत स्तंभ थे।

​नंबर-3 से लेकर नंबर-6 तक हर क्रम पर आकर शतक लगाना, दबाव में भी कभी तकनीक से समझौता न करना और कलात्मकता के साथ रन बनाना इयान बेल की असली पहचान थी!

​2013 की एशेज़ में उनकी वो स्वर्णिम शतकीय पारियाँ या उनका सिग्नेचर 'कवर ड्राइव'— इयान बेल का आपका सबसे पसंदीदा पल कौन सा है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

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8 अगस्त 1973—ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर और ब्रेट ली के बड़े भाई शेन ली का जन्म! ​आज ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर शेन ली (S...
08/08/2026

8 अगस्त 1973—ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर और ब्रेट ली के बड़े भाई शेन ली का जन्म! ​आज ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर शेन ली (Shane Lee) का जन्मदिन है! तेज़ गेंदबाज़ ब्रेट ली (Brett Lee) के बड़े भाई, शेन ली एक उपयोगी मध्यम-तेज़ गति के गेंदबाज़ और आक्रामक निचले क्रम के बल्लेबाज़ थे।

​डेब्यू मैच का प्रभाव, विश्व कप और समय से पहले संन्यास:

एडिलेड 1995 में धमाकेदार पदार्पण: 1995 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ एडिलेड में अपने पहले वनडे मैच में उन्होंने महज़ 27 गेंदों में 39 रनों की तूफ़ानी पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

1996 विश्व कप और उतार-चढ़ाव: उन्हें 1996 के वनडे विश्व कप की ऑस्ट्रेलियाई टीम में शामिल किया गया था, लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके और बाद में उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा।

न्यू साउथ वेल्स की कप्तानी (2000): घरेलू क्रिकेट में उनका दबदबा कायम रहा और सन 2000 में उन्हें न्यू साउथ वेल्स (New South Wales) की प्रांतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया।

चोटों से संघर्ष और संन्यास: घुटने की लगातार गंभीर समस्याओं के कारण उनका खेल प्रभावित हुआ। केवल 29 वर्ष की आयु में अप्रैल 2003 में उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से समय से पहले संन्यास ले लिया।

अंतरराष्ट्रीय करियर: उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 45 एकदिवसीय (ODI) मैच खेले, जिनमें 477 रन बनाए और 48 विकेट हासिल किए।

​चोटों के कारण लंबा करियर न जी पाने के बावजूद अपने ऑलराउंड खेल से ऑस्ट्रेलिया और न्यू साउथ वेल्स को योगदान देने वाले शेन ली को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

कलाई का जादूगर, स्पिनरों का काल और पाकिस्तान क्रिकेट का बेजोड़ 'मैच-विनर'! ​1980 और 90 के दशक में जब पाकिस्तान क्रिकेट अ...
08/08/2026

कलाई का जादूगर, स्पिनरों का काल और पाकिस्तान क्रिकेट का बेजोड़ 'मैच-विनर'! ​1980 और 90 के दशक में जब पाकिस्तान क्रिकेट अपने स्वर्णिम दौर में था, तब मध्यक्रम में आकर कलाई के गज़ब के इस्तेमाल से मैदान के चारों ओर रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे सलीम मलिक (Saleem Malik)!

​अपनी कलात्मक बल्लेबाज़ी, दबाव के पलों में शांत दिमाग से लक्ष्य का पीछा करने और विशेष रूप से स्पिन गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ अटैक करने की अद्भुत क्षमता के कारण वे अपने दौर के सबसे खतरनाक मध्यक्रम बल्लेबाज़ों में गिने जाते थे।

​सलीम मलिक की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:

10,000+ अंतर्राष्ट्रीय रन और 20 शतक: 103 टेस्ट मैचों में 43.69 की बेहतरीन औसत से 5,758 रन (15 शतक) और 283 वनडे मैचों में 7,170 रन (5 शतक) बनाए।

डेब्यू टेस्ट में ऐतिहासिक शतक: 1982 में कराची के मैदान पर श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही शानदार 100 रन बनाकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी धमाकेदार एंट्री दर्ज कराई थी।

कोलकाता में शेन वॉर्न और ऑस्ट्रेलिया की उड़ाई धज्जियाँ (1987): 1987 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ केवल 36 गेंदों में नाबाद 72 रनों की तूफ़ानी पारी खेलकर हारा हुआ मैच पाकिस्तान की झोली में डाल दिया था!

1992 विश्व कप विजेता टीम के अहम सदस्य: इमरान खान की कप्तानी में 1992 का ऐतिहासिक वनडे विश्व कप जीतने वाली पाकिस्तान टीम का वे एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे।

​स्पिनरों की गेंदों पर लेग-साइड में फ्लिक मारना, लेट-कट खेलना और बिना किसी दबाव के तेज़ गति से रन बनाना सलीम मलिक की बल्लेबाज़ी की असली खूबी थी!

​1987 में कोलकाता के मैदान पर खेली गई उनकी वो 36 गेंदों में 72 रनों की अविश्वसनीय पारी या स्पिनरों के ख़िलाफ़ उनका जादुई फ़ुटवर्क— सलीम मलिक के बारे में आपकी क्या राय है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!

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