09/09/2026
25 जून 1983 - जब कपिल के डेविल्स ने लॉर्ड्स में रचा था इतिहास
25 जून 1983 भारतीय खेल इतिहास का वो सबसे महान सवेरा था जिसने भारत में क्रिकेट को एक धर्म बना दिया। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर कपिल देव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने अजेय और खूंखार वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप अपने नाम किया था।
मैच से पहले पूरी दुनिया मान रही थी कि वेस्टइंडीज की हैट्रिक पक्की है लेकिन भारतीय टीम के हौसलों के आगे कैरेबियन घमंड चकनाचूर हो गया।
उस ऐतिहासिक फाइनल के वो पल जिन्होंने हर भारतीय को रोने पर मजबूर कर दिया:
सिर्फ 183 रनों पर सिमटा भारत: वेस्टइंडीज की खतरनाक तेज गेंदबाजी के सामने भारतीय टीम सिर्फ 183 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा 38 रन के श्रीकांत ने बनाए। आधी दुनिया मान चुकी थी कि मैच खत्म हो चुका है।
विव रिचर्ड्स का तूफान और कपिल का वो जादुई कैच: लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने 1 विकेट पर 50 रन बना लिए थे। महान विव रिचर्ड्स सिर्फ 28 गेंदों में 33 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा रहे थे। लेकिन तभी मदन लाल की गेंद पर रिचर्ड्स ने हवा में शॉट खेला और कप्तान कपिल देव ने पीछे की तरफ दौड़ते हुए जो अविश्वसनीय कैच लपका उसने पूरे मैच का रुख ही पलट दिया।
मीडियम पेसर्स का कहर: रिचर्ड्स के आउट होते ही वेस्टइंडीज का स्कोर 50/1 से देखते ही देखते 76 रन पर 6 विकेट हो गया। भारत के मीडियम पेसर्स मदन लाल, मोहिंदर अमरनाथ, बलविंदर संधू ने लॉर्ड्स की पिच पर ऐसा जाल बुना कि दुनिया के सबसे खूंखार बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह बिखर गए।
जिमी अमरनाथ का ऑलराउंड जलवा: मोहिंदर अमरनाथ इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे। उन्होंने पहले बल्ले से महत्वपूर्ण 26 रन बनाए और फिर कड़क गेंदबाजी करते हुए महज 12 रन देकर 3 विकेट चटकाए जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
जैसे ही अमरनाथ ने माइकल होल्डिंग को LBW आउट किया पूरा लॉर्ड्स मैदान भारतीय फैंस से भर गया। वेस्टइंडीज 140 रन पर ऑल आउट हो गया और भारत ने 43 रनों से वो जीत दर्ज की जिसने भारतीय क्रिकेट की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी।
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और क्रिकेट रिकॉर्ड्स पर आधारित है।