08/08/2026
लॉर्ड्स का शहंशाह, वेस्टइंडीज़ के खूंखार पेस अटैक का काल और भारतीय क्रिकेट का 'कर्नल'! 1970 और 80 के दशक में जब वेस्टइंडीज़ के आक्रामक और तेज़ गेंदबाज़ दुनिया भर के बल्लेबाज़ों में खौफ़ पैदा करते थे, तब भारत के लिए नंबर-3 पर आकर सीना ठोककर क्रीज़ पर डटने वाले बल्लेबाज़ थे दिलीप वेंगसरकर (Dilip Vengsarkar)!
अपनी शानदार ड्राइव्स, गज़ब के संतुलन और क्रीज़ पर अपनी दबदबे वाली शैली के कारण उन्हें प्यार से 'कर्नल' (Colonel) कहा जाता था। जब वे अपनी लय में होते थे, तो दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ उन्हें रन बनाने से नहीं रोक पाता था।
दिलीप वेंगसरकर की वो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ जो उन्हें 'अमर' बनाती हैं:
लॉर्ड्स (Lords) के मैदान पर हैट्रिक शतक: क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर लगातार तीन टेस्ट मैचों (1979, 1982, 1986) में तीन शतक जड़ने वाले वे दुनिया के एकमात्र विदेशी बल्लेबाज़ हैं!
10,000+ अंतर्राष्ट्रीय रन और 17 टेस्ट शतक: 116 टेस्ट मैचों में 42.13 की औसत से 6,868 रन (17 शतक) और 129 वनडे मैचों में 3,508 रन बनाए।
1986 में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ (ICCI Ranking No.1): 1986-87 के दौर में वे अपने करियर के चरम पर थे और आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज़ बने थे।
1983 विश्व कप विजेता टीम के मुख्य सदस्य: कपिल देव की कप्तानी में 1983 का ऐतिहासिक वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का वे एक बेहद अहम हिस्सा थे।
1986 की ऐतिहासिक इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ जीत: 1986 में इंग्लैंड की सरज़मीं पर 2-0 से टेस्ट सीरीज़ जीतने में उन्होंने लगातार शतकीय पारियाँ खेलकर 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' का ख़िताब जीता था।
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उनका वो महारिकॉर्ड, विदेशी धरती पर दबाव में शतक ठोकना और भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बनना— 'कर्नल' के बेजोड़ क्रिकेट सफर की पहचान है!
लॉर्ड्स में उनके लगातार तीन शतक या वेस्टइंडीज़ के पेसर्स के ख़िलाफ़ उनकी निडर बल्लेबाज़ी— दिलीप वेंगसरकर की कौन सी याद आपके दिल में सबसे ताज़ा है? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!
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