26/11/2025
शारीरिक चुनौती के आगे, झुकत ना सिर हमार।
क्रिकेट के मैदान में, जीत के रखब ज़ोर सार।।
व्हीलचेयर पर बैठ के, बल्ला चलावत ज़ोर।
चौका-छक्का की गड़गड़ाहट, भर देता मन मोर।।
आँख ना रहे जेकर, सुन के गेंद के आवाज़।
लगावत छक्का ऐसन, हो जाय सबके सरगाज।।
एक हाथ से फेंकत गेंद, ऐसन ठुमक के चाल।
विकेट गिरे की आवाज़, मीठा लागे रसाल।।
"दिव्यांग" कहि के जे कोऊ, हमपर करे दया-भाव।
मैदान में देख लेइन, हमार जुनून औज नाव।।
भागबा ना पाव से, पर दृढ़ इरादा बड़ बल।
खेल के जे दिअवऽ, ओहू से होइहै पाला मल।।
टीम के साथी मिल के, बनावत हम सपनो के पार।
जीत के झंडा गाड़ देत, नाम कर देत उजियार।।
ताली बजे स्टेडियम में, जब लगावत छक्का सीध।
भुल जाय सब दुखड़ा, मन में उठे उमंग बीध।।
अइसन हिम्मत वाला, हम दिव्यांग क्रिकेटर।
दुनिया के देखि ले, हमार जज्बा अजब-गजब।।
साबित कर देब हम, कि मंजिल मिले जे राह में।
हौसला हो ऊँचा, त बाँटे ना कोऊ बाधा में।।
अरविन्द पाठक