11/08/2026
पिछले कुछ दिन से मैंने गौर किया है कि मेरे कैंप के बगल में जितने पेड़ हैं, उस पर ये पक्षी आकर बैठते हैं और गौर में आया कि जहाँ बैठे हैं, उसके सारे पत्ते गायब होते जा रहे हैं। शुरुआत में यह देखकर थोड़ा अजीब लगा कि आखिर पेड़ की बाकी डालियाँ तो हरी-भरी हैं, लेकिन जिन जगहों पर ये पक्षी डेरा डाले हुए हैं, वहाँ के पत्ते धीरे-धीरे पूरी तरह गायब क्यों होते जा रहे हैं।
बहुत सोचने और लोगों से पूछताछ करने तथा अन्य सोर्स से अध्ययन करने के बाद इस के पीछे की वजह सामने आई। यह खूबसूरत और बड़े आकार का पक्षी एशियन ओपनबिल स्टॉर्क (Asian Openbill Stork) है, जिसे आम बोलचाल में 'शामुकखोल' भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया के आर्द्रभूमि, झीलों और धान के खेतों के आसपास पाया जाने वाला एक प्रमुख जलीय पक्षी है। इनका मुख्य आहार शंख और बड़े घोंघे (Snails) होते हैं, जिन्हें ये अपनी खास और अनोखी चोंच की बनावट से आसानी से तोड़कर खाते हैं, इसी कारण कुछ क्षेत्रों में इसे घोंघईला भी बोलते है। ये सामाजिक पक्षी होते हैं जो अक्सर बड़े झुंडों में ऊंचे पेड़ों पर अपने घोंसले बनाते हैं।
जब इन पक्षियों को कैंप के पास के पेड़ों पर लगातार बैठते और घोंसले बनाते देखा गया, तो पेड़ों के पत्ते गायब होने के पीछे के वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारणों की यह रोचक सच्चाई सामने आई, इन पक्षियों के मल (Droppings) में यूरिक एसिड, नाइट्रोजन और अमोनिया की मात्रा अत्यधिक उच्च स्तर पर होती है। जब यह मल लगातार पेड़ों की पत्तियों और शाखाओं पर गिरता है, तो अत्यधिक रासायनिक सांद्रता के कारण पत्तियां रासायनिक रूप से झुलस जाती हैं और समय से पहले ही सूखकर झड़ जाती हैं।इस प्रक्रिया को नाइट्रोजन बर्न कहते है। इसके अलावा ये पक्षी अपने विशाल और मजबूत घोंसलों को बनाने या उन्हें संवारने के लिए बहुत सक्रिय रहते हैं। इसके लिए वे अपनी चोंच से आसपास की ताज़ा हरी टहनियों और पत्तियों को लगातार तोड़कर इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे वह हिस्सा धीरे-धीरे पत्ताहीन होने लगता है।एक कारण यह भी माना जाता है कि लगातार भारी मात्रा में बीट गिरने से उस विशेष हिस्से के पेड़ के पर्णसमूह (Foliage) और आसपास की संरचना पर गहरा असर पड़ता है, जिससे वहाँ नई पत्तियों का विकास रुक जाता है और वह डाल पूरी तरह गंजी या सूखी हुई नजर आने लगती है। इसको अम्लीय प्रभाव कहते हैं।
प्रकृति का यह चक्र वाकई हैरान करने वाला है। एक तरफ जहाँ ये पक्षी हमारी जैव विविधता और पर्यावरण का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वहीं इनका दैनिक रहन-सहन हमारे आस-पास के पेड़ों पर ऐसा अनूठा प्रभाव भी छोड़ जाता है। कैंप के पास बैठकर इस पूरी प्राकृतिक प्रक्रिया को देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है।