29/06/2019
*श्री बाल कृष्ण लाल की एक बाल लीला *
* एक बार नंदबाबा सुबह की पूजा कर रहे थे। और फिर पूजा करने के बाद नंदबाबा नाम स्मरण करने लगे।*
* आंखें बंद करके नंदबाबा नाम स्मरण कर रहे थे कि तभी नटखट कान्हा जी वहां आ पहुंचे।*
* कान्हा जी ने थोडी देर नंदबाबा की ओर देखा बाद में पाट पर बिराजते शालिग्राम जी को हाथ में उठा लिया।*
* थोडी देर देखने के बाद कान्हा जी ने शालिग्राम जी को अपने मुख में भर लिया। अब कान्हा जी का मुख थोडा फुला हुआ दिख रहा था।*
* थोडी देर के बाद जब नंदबाबा ने अपनी आंखे खोली तो कन्हैया को पास में ही खेलता हुआ देखा।*
* अब नंदबाबा को शालिग्राम जी की पूजा ही करनी थी। लेकिन शालिग्राम जी कहीं पर दिखाई ही नही दिए।*
* नंदबाबा ने पाट पर देखा , फिर आसपास भी देखा, कहीं भी नहीं दिखाई दिया तो नंदबाबा सोचने लगे कि आज यशोदा ने पूजा में शालिग्राम जी क्युं नहीं रखे होंगे?*
* फिर नंदबाबा ने भवन के भीतर आवाज लगाई : यशोदा , आज पूजा में शालिग्राम जी क्युं नहीं रखे हैं? जल्दी से शालिग्राम जी लाओ।*
* यशोदा मैया ने भीतर से ही कहा : शालिग्राम जी तो आपके हाथ में ही था। वहीं कहीं रख दिया होगा। जरा ध्यान से देखिए।*
* नंदबाबा ने कहा कि मैने सब जगह पर ढुंढ लिया है। कही नहीं दिख रहे हैं। तुम जल्दी से यहां आओ।*
* और इन सबके बीच नटखट कन्हैया जी बडी भोली सी सूरत किये हुए अपनी आंखे बंद करके वैसे ही बैठे हुए थे जैसे नंदबाबा नाम स्मरण करते हुए बैठते हैं।*
* फिर भीतर से यशोदा मैया आई उन्होंने भी चारो तरफ देखते हुए ढुंढना शुरू कर दिया। लेकिन उन्हें भी शालिग्राम जी कहीं पर नहीं दिख रहे हैं।*
* तभी यशोदा मैया ने कान्हा जी की तरफ देखा। और उनको कान्हा जी का मुख थोडा फुला हुआ दिख रहा है।*
* मैया सब कुछ समज गयी, फिर यशोदा मैया ने नंदबाबा को कन्हैया के मुख को देखने का इशारा किया। कि देखिए, शालिग्राम जी कन्हैया के मुख में लग रहा है।*
* फिर यशोदा मैया भवन के भीतर अपने कामकाज के लिए चली जाती है।*
*और नंदबाबा बड़े ध्यान से कान्हा जी का मुख देख रहे हैं।*
* तब नंदबाबा ने कान्हा जी को कहा कि अपने मुख में क्या रखा है?*
* कान्हा जी बडी मासुमियत से मुख हिलाते हुए कहते हैं कि कुछ भी तो नहीं है।*
* नंदबाबा को अब पूरा विश्वास हो गया था कि शालिग्राम जी कन्हैया के मुख में ही है।*
* तो नंदबाबा ने कहा कि तनिक अपना मुख तो खोल कान्हा।*
* फिर कान्हा जी ने धीरे से अपना मुख खोला तो मुख में शालिग्राम जी दिखाई दिया।*
* फिर नंदबाबा ने प्यार से समजाते हुए कहा कि कान्हा , यह शालिग्राम जी है। यह साक्षात श्री विष्णु स्वरूप है।*
* यह कोई खिलौना नहीं है। इनकी पूजा करते हैं। इससे खेलते नहीं हैं।*
* अब नंदबाबा को यह ज्ञात नहीं है कि साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम के मुख में ही शालिग्राम जी है।*
* फिर नंदबाबा ने धीरे से शालिग्राम जी को कान्हा जी के मुख से निकाला।*
* लेकिन जैसे ही शालिग्राम जी को बाहर निकाला , तो कान्हा जी के मुख में नंदबाबा को पूरा ब्रम्हांड दिखाई दिया।*
* नंदबाबा अचम्भित हो गए। नंदबाबा ने अपनी आंखों पर हाथ रखा और फिर से देखा तो पूरा ब्रम्हांड कान्हा जी के मुख में घुमता हुआ देखा।*
*तभी सहसा नंदबाबा को गर्ग ऋषि के वचन याद आ गए। कि साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम का प्रागट्य आपके घर में होने वाला है।*
* और यह बात गर्ग ऋषि ने एकांत में सिर्फ नंदबाबा को ही बताई थी। जब उस समय यशोदा मैया भीतर भवन में थी और सिर्फ नंदबाबा और गर्ग ऋषि ही थे।*
* फिर कान्हा जी ने धीरे से अपना मुख बंद कर दिया और फिर से नंदबाबा की ओर देखने लगे जैसे कुछ हुआ ही न हो।*
* नंद भवन में भी बाल कृष्ण लाल जी नित्य नवीन लीलाएं करके सभी को आनंदित करते रहते हैं।*
*आशा है कि आप सभी को इस लीला से अलौकिक आनंद की प्राप्ति हुई होगी *
*श्री बाल कृष्ण लाल की जय हो *