06/07/2026
अगर डेब्यू मैच से ही खिलाड़ियों का भविष्य तय होता, तो शायद भारत को सचिन, धोनी, विराट और रोहित कभी नहीं मिलते...!
मात्र 15 वर्ष 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर का सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 10 गेंदों पर 14 रन बनाए, जिसमें 2 शानदार छक्के शामिल थे। इसके बाद वे विल जैक्स की गेंद पर जोस बटलर द्वारा स्टंप आउट हो गए।
बस इतना ही हुआ... और कुछ लोग उन्हें ट्रोल करने लगे।
लेकिन शायद वे यह भूल गए कि प्रकृति कभी भी किसी बीज से पहले ही दिन फल की उम्मीद नहीं करती। नदी भी समुद्र बनने से पहले हजारों ठोकरें खाती है, और हीरा भी चमकने से पहले वर्षों तक धरती के अंधेरे में दबा रहता है।
आज जो लोग एक पारी देखकर फैसला सुना रहे हैं, उन्हें ज़रा इन महान खिलाड़ियों के डेब्यू आंकड़े भी याद कर लेने चाहिए—
👉 सचिन तेंदुलकर – 18 दिसंबर 1989, पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू में 0 रन ।
👉 एमएस धोनी – 23 दिसंबर 2004, बांग्लादेश के खिलाफ वनडे डेब्यू में 0 रन (रन आउट)।
👉 युवराज सिंह – 3 अक्टूबर 2000, केन्या के खिलाफ वनडे डेब्यू में 0 रन।
👉 वीरेंद्र सहवाग – 1 अप्रैल 1999, पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू में 1 रन।
👉 सौरव गांगुली– 11 जनवरी 1992, वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे डेब्यू में 3 रन।
👉 रोहित शर्मा– 23 जून 2007 को पहले वनडे में बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला, दूसरे मैच (24 जून 2007, दक्षिण अफ्रीका) में 8 रनबनाए।
👉 विराट कोहली – 18 अगस्त 2008, श्रीलंका के खिलाफ वनडे डेब्यू में 12 रन।
अगर डेब्यू मैच ही किसी खिलाड़ी का भविष्य तय करता, तो शायद क्रिकेट का इतिहास कुछ और होता।
इसलिए एक 15 साल के लड़के को उसकी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी के आधार पर जज मत कीजिए। उसे समय दीजिए, भरोसा दीजिए और आगे बढ़ने का मौका दीजिए।
हो सकता है आज जिन 14 रनों पर कुछ लोग हँस रहे हैं, आने वाले वर्षों में वही खिलाड़ी अपने बल्ले से करोड़ों भारतीयों को गर्व करने का मौका दे।
महान खिलाड़ी पहली पारी से नहीं, अपने पूरे सफर से पहचाने जाते हैं। 🇮🇳🏏